कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल पुलिस का अलर्ट - तिब्बत की तरफ़ बना डैम टूटा, लोगों से सुरक्षित जगह पर जाने को कहा      Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat LIVE: खत्म हुआ राहुकाल! फिर शुरू हुआ राखी का शुभ मुहूर्त, जानिए कब तक बां      धोखाधड़ी, उत्पीड़न और फिर मर्डर; दिल्ली की मॉडल हत्या मामले में 'जहरीले रिश्ते' का खुलासा      ज़ोहरान ममदानी को लेकर प्रवासी भारतीयों में बहस, आरएसएस ने जारी किया ये बयान      आज लोकसभा चुनाव हुए तो BJP को मिलेंगी कितनी सीटें, इंडिया गठबंधन में शामिल दलों का कैसा हाल, C-वोटर का आया सर्वे      पाकिस्तान ने फंसाया एक और ‘मुर्गा’, सऊदी अरब-तुर्की के बाद इस देश के साथ मिलिट्री डील, बदले में क्या मिलेगा...      रिजिजू ने दिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के संकेत, परिसीमन बिल पर टिकीं निगाहें; विपक्ष में हलचल      दिल्ली आ गई 'कांदा एक्सप्रेस', 60-70 रुपये वाला प्याज अब 35 रुपये किलो, जानिए कहां मिलेगा?     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
स्वास्थ्य

बढ़ता खतरा: ठंडे पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में डेंगू-मलेरिया के मच्छर और 13 नई प्रजातियां मिलीं

विश्व मच्छर दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के प्रसार को लेकर बड़ी चिंता जताई है, जहां ठंडे मौसम के बीच भी इन कीटों की 13 नई प्रजातियां दर्ज की गई हैं।

A
Ankit Yadav
21 अग 2026, 18:56
बढ़ता खतरा: ठंडे पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में डेंगू-मलेरिया के मच्छर और 13 नई प्रजातियां मिलीं
विश्व मच्छर दिवस के मौके पर सामने आए ताजा वैज्ञानिक तथ्यों ने देश के पहाड़ी राज्यों की स्वास्थ्य प्रणालियों को सकते में डाल दिया है। पारंपरिक रूप से ठंडे और कम तापमान वाले माने जाने वाले पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में अब डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों के वाहक मच्छर आसानी से पनपने लगे हैं। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं द्वारा किए गए हालिया अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण इन कीटों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां पर्वतीय इलाकों में भी तैयार हो रही हैं, जो आने वाले दिनों में स्थानीय आबादी के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा कर सकती हैं।

बदलते मौसम का असर और नई प्रजातियों का विस्तार

वैज्ञानिक जांच के दौरान इस ठंडे पहाड़ी भूभाग में मच्छरों की कुल 13 नई प्रजातियों की पहचान की गई है। पहले यह माना जाता था कि अत्यधिक ठंड और कम तापमान के कारण इन खतरनाक वेक्टर जनित रोगों के मच्छर पहाड़ी इलाकों में जीवित नहीं रह सकते हैं, लेकिन हालिया आंकड़े इस धारणा को पूरी तरह से खारिज करते हैं। पर्यावरण में हो रहे बदलावों और तापमान में लगातार वृद्धि के कारण इन कीटों ने खुद को ठंडे वातावरण के अनुकूल ढाल लिया है, जिससे इन क्षेत्रों में भी संक्रामक रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों और पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इन बीमारियों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है, जिसके चलते संक्रमण फैलने का जोखिम और भी अधिक बढ़ जाता है। स्थानीय प्रशासन और चिकित्सा विभागों को अब पहाड़ी क्षेत्रों में भी मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता महसूस हो रही है, ताकि समय रहते इन कीटों के प्रसार को रोका जा सके। आने वाले समय में शोधकर्ताओं का जोर इस बात पर होगा कि इन नई प्रजातियों के व्यवहार और उनके पनपने के कारणों का बारीकी से अध्ययन किया जाए। इसके साथ ही, लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि वे अपने आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरों के प्रजनन को रोक सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और आम जनता दोनों को मिलकर इस उभरती हुई चुनौती का सामना करना होगा, अन्यथा पर्वतीय राज्यों में भी डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां महामारी का रूप ले सकती हैं।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज