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बड़ा फैसला: हिमाचल प्रदेश में एनालॉग पनीर पर लगेगा पूर्ण प्रतिबंध, मंडी जिले में मिले 20 नमूने फेल
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में एनालॉग पनीर की बिक्री और उत्पादन पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने का बड़ा निर्णय लिया है। हाल ही में मंडी जिले में लिए गए पनीर के नमूनों की जांच रिपोर्ट में गंभीर खुलासे हुए हैं, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया है।
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Ankit Yadav
21 अग 2026, 16:12
हिमाचल प्रदेश में खाद्य सुरक्षा और आम जनता के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए राज्य प्रशासन ने एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा कदम उठाने का मन बनाया है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों और रिपोर्ट्स के अनुसार, पहाड़ी राज्य में जल्द ही एनालॉग पनीर को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इस प्रकार के कृत्रिम और सिंथेटिक उत्पादों की वजह से बाजार में शुद्ध दूध से बने उत्पादों की आड़ में मिलावट का खेल चल रहा था, जो अब आम नागरिकों की सेहत के लिए सीधा खतरा बनता जा रहा है। सरकार की इस आगामी कार्रवाई से मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है।
मंडी में जांच के दौरान फेल हुए दर्जनों सैंपल
इस पूरी सख्ती के पीछे हाल ही में मंडी जिले से सामने आए आंकड़े मुख्य वजह बने हैं। स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विंग द्वारा जिले के विभिन्न बाजारों से उठाए गए पनीर के नमूनों की जब प्रयोगशाला में कड़ी जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कुल 20 सैंपल जांच के दौरान पूरी तरह फेल हो गए, जिनमें मानक के विपरीत घटिया सामग्री और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्वों की पुष्टि हुई। इन नमूनों के फेल होने के बाद से ही स्थानीय स्तर पर चिंताएं काफी बढ़ गई थीं, जिसके परिणामस्वरूप अब सरकार ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का एनालॉग पनीर मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इसके सेवन से न केवल पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं पैदा होती हैं, बल्कि लंबे समय तक ऐसे अस्वास्थ्यकर पदार्थों के शरीर में जाने से कैंसर जैसी घातक और लाइलाज बीमारियों का जोखिम भी कई गुना बढ़ जाता है। मिलावटी तेल, स्टार्च और अन्य केमिकल से तैयार होने वाला यह नकली उत्पाद असली पनीर जैसा दिखता जरूर है, लेकिन पोषण के नाम पर यह शरीर को केवल जहर देने का काम करता है।
प्रशासन और खाद्य विभाग की आगामी कड़ी कार्रवाई
आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश का खाद्य सुरक्षा विभाग पूरे राज्य में विशेष अभियान चलाने की योजना बना रहा है ताकि इस प्रकार के खतरनाक उत्पादों के भंडारण, परिवहन और खुदरा बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके। होटल, ढाबे और डेयरियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि आम जनता को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ मिल सकें। सरकार का यह कदम राज्य के हर नागरिक के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, बशर्ते इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।