Lucknow Desk : लखनऊ मंडल में बारिश और उमस के बीच मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। मंडल में 24 अगस्त तक मलेरिया के 1,084 मामले सामने आए हैं। वहीं डेंगू के 135 मरीज भी मिले हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बुखार से पीड़ित लोगों की जांच और बीमारी की निगरानी बढ़ाने को कहा गया है। मलेरिया के मामलों में सीतापुर सबसे आगे है। यहां अब तक 563 मरीज सामने आ चुके हैं। इसके बाद हरदोई में 219 और लखनऊ में 212 लोगों में मलेरिया की पुष्टि हुई है।
खीरी में 75, उन्नाव में 14 और रायबरेली में एक मरीज मिला है। आंकड़ों से साफ है कि मंडल के कुछ जिलों में मलेरिया का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। डेंगू की स्थिति पर नजर डालें तो कुल 135 मामलों में से 98 मरीज अकेले लखनऊ में मिले हैं। यानी मंडल में सामने आए डेंगू के करीब 73 प्रतिशत मामले लखनऊ से हैं। हरदोई में छह, खीरी और उन्नाव में 10-10, जबकि रायबरेली में दो डेंगू मरीज सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद कई जगहों पर पानी जमा हो जाता है। घरों के आसपास, छतों, कूलर, गमलों और खाली प्लॉट में जमा पानी मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल जगह बन सकता है।
ऐसे में थोड़ी सी सावधानी बरतकर मच्छरों की संख्या को कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें और गमलों व दूसरे बर्तनों में पानी जमा न रहने दें। खाली प्लॉट या आसपास जमा पानी को भी साफ कराना जरूरी है। डॉक्टरों की सलाह है कि लगातार बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, कमजोरी या अन्य परेशानी को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जांच कराएं। समय पर बीमारी की पहचान होने से इलाज शुरू करने में आसानी होती है। बारिश का मौसम अभी जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के लिए लोगों की सावधानी और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी दोनों ही महत्वपूर्ण रहेंगी।