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स्वास्थ्य

खानपान की नई नीति: पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर लगेंगे लाल निशान, एफएसएसएआई का बड़ा निर्देश

खाद्य सुरक्षा नियामक एफएसएसएआई ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के नियमों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत अधिक चीनी, नमक और वसा वाले उत्पादों पर स्पष्ट रूप से लाल निशान दिखाना अनिवार्य होगा।

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Ankit Yadav
29 अग 2026, 13:06
खानपान की नई नीति: पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर लगेंगे लाल निशान, एफएसएसएआई का बड़ा निर्देश
आज के दौर में बाजारों में मिलने वाले पैकेटबंद और डिब्बाबंद खानपान का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है, जिसे देखते हुए स्वास्थ्य और सुरक्षा के मोर्चे पर चिंताएं भी लगातार गहरी होती जा रही हैं। उपभोक्ताओं को उनके खानपान की आदतों के प्रति जागरूक बनाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई ने सख्त दिशा-निर्देशों पर विचार करना शुरू कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब उन सभी पैक किए गए खाद्य उत्पादों को चिन्हित किया जाएगा जिनमें अत्यधिक मात्रा में चीनी, नमक या फिर सैचुरेटेड फैट मौजूद होता है। इसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं से बचाना और उन्हें यह स्पष्ट रूप से समझाना है कि वे क्या खा रहे हैं।

उपभोक्ता जागरूकता और स्वास्थ्य सुरक्षा

पैकेजिंग पर दिखने वाले ये लाल निशान लोगों को बाजार से खरीदे जाने वाले सामानों में मौजूद छिपे हुए जोखिमों के प्रति तुरंत आगाह करेंगे। अक्सर देखा गया है कि लोग बिना सामग्री सूची को पढ़े अनजाने में ऐसी चीजें खरीद लेते हैं जो उनके शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं। जब इन उत्पादों के सामने स्पष्ट चेतावनी के रूप में लाल रंग के निशान का इस्तेमाल किया जाएगा, तो खरीदार दुकान पर ही यह फैसला ले सकेंगे कि उन्हें वह सामान खरीदना चाहिए या नहीं। इस प्रकार का पारदर्शी कदम समाज में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने में काफी मददगार साबित हो सकता है। नियामक निकाय की ओर से उठाए गए इस महत्वपूर्ण कदम के पीछे विशेषज्ञों की उन चेतावनियों का भी हाथ है जिनमें लगातार यह कहा जा रहा है कि असंतुलित आहार युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डाल रहा है। जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड में अत्यधिक मात्रा में प्रयुक्त होने वाले तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और आंतरिक अंगों को कमजोर कर देते हैं। इस नई चेतावनी प्रणाली के लागू होने से न केवल आम जनता को जागरूक होने का अवसर मिलेगा, बल्कि खाद्य निर्माण कंपनियों पर भी अपने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने का दबाव बनेगा। कंपनियों को अपने व्यंजनों में हानिकारक तत्वों की मात्रा को कम करने के लिए नए विकल्प तलाशने होंगे ताकि वे बाजार में अपनी स्थिति बनाए रख सकें। भविष्य में इस तरह के नियमों के पूर्ण क्रियान्वयन से देश के खाद्य बाजार में एक बड़ा बदलाव आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने भी इस पहल का स्वागत किया है क्योंकि यह जनता के हित से जुड़ा हुआ एक अत्यंत आवश्यक निर्णय है। आने वाले समय में जैसे-जैसे यह नियम धरातल पर उतरेगा, वैसे-वैसे लोगों की खानपान की प्राथमिकताओं में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार और नियामक संस्थाएं मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि देश का प्रत्येक नागरिक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण आहार का उपभोग करे।
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