देवरिया से नागपुर की खदानों तक का कठिन शुरुआती सफर
भारतीय क्रिकेट जगत में अपनी रफ्तार के लिए पहचाने जाने वाले अनुभवी तेज गेंदबाज उमेश यादव रविवार 25 अक्टूबर को 39 वर्ष के हो गए हैं। उनके पिता तिलक यादव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी थे, जो आजीविका की तलाश में महाराष्ट्र के नागपुर में आ बसे थे। नागपुर के निकट खापरखेड़ा स्थित वेस्टर्न कोल लिमिटेड की कोयला खदान में उनके पिता कार्य करते थे। इसी कोयला खदान की कॉलोनी की तंग बस्तियों और वित्तीय कठिनाइयों के साये में उमेश यादव का जन्म और लालन-पालन हुआ। शुरुआती दौर में उनका जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा और खेलकूद में आने से पहले उनकी मुख्य इच्छा एक सुरक्षित सरकारी रोजगार प्राप्त करने की थी। देश सेवा के उद्देश्य से वह सशस्त्र बलों और पुलिस महकमे में जाने के लिए उत्सुक थे। उन्होंने पुलिस तथा सेना के सिपाही पद की चयन प्रक्रिया में दौड़ लगाने के लिए काफी कठिन परिश्रम किया था, परंतु दुर्भाग्यवश उन्हें उसमें सफलता प्राप्त नहीं हो सकी। आज खेल प्रेमी अक्सर यह चर्चा करते हैं कि उनका चयन न होना भारतीय क्रिकेट के हित में रहा, क्योंकि यदि वह पुलिस सेवा में चले जाते तो देश एक बेहद प्रतिभाशाली और तीव्र गति के गेंदबाज से वंचित रह जाता। अपने शुरुआती दिनों में वह केवल टेनिस गेंद के माध्यम से ही क्रिकेट का अभ्यास किया करते थे। बाद के समय में उन्होंने विदर्भ क्रिकेट संघ के अंतर्गत जूनियर स्तर पर लेदर गेंद से खेलना शुरू किया और फिर विदर्भ की मुख्य टीम का हिस्सा बन गए।
रणजी ट्रॉफी से लेकर आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय पदार्पण
घरेलू क्रिकेट में अपने कौशल को निखारने के बाद उमेश यादव को साल 2008 में रणजी ट्रॉफी प्रतियोगिता में खेलने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ। अपने प्रथम ही मुकाबले की पहली पारी में उन्होंने बेहतरीन गेंदबाजी का मुज़ाहिरा करते हुए 75 रन देकर चार बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया। इस शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें दलीप ट्रॉफी की टीम में भी शामिल कर लिया गया। उनके जीवन और क्रिकेट करियर में सबसे बड़ा बदलाव साल 2010 में देखने को मिला, जब आईपीएल की नीलामी प्रक्रिया के दौरान दिल्ली डेयरडेविल्स ने उन्हें 18 लाख रुपये की राशि में अपने साथ जोड़ा। इस आर्थिक मदद ने उनके परिवार की बरसों पुरानी वित्तीय तंगी को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। वह विदर्भ प्रांत के इतिहास के ऐसे पहले खिलाड़ी बने जिन्होंने देश के लिए टेस्ट क्रिकेट में भाग लिया। उन्होंने मई 2010 में जिम्बाब्वे के विरुद्ध अपना एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। हालांकि शुरुआती त्रिकोणीय प्रतियोगिता में उनका प्रदर्शन सामान्य रहा और दिसंबर 2010 के दक्षिण अफ्रीका दौरे के पश्चात उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। इसके बाद नवंबर 2011 में चयनकर्ताओं ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दौरे के वास्ते श्रीसंत और प्रवीण कुमार के स्थान पर उमेश यादव तथा वरुण आरोन को मौका दिया। इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए उन्होंने अपने पहले टेस्ट मैच की दूसरी पारी में 36 रन खर्च कर दो विकेट झटके और भारत की विजय में अहम भूमिका निभाई। इस संपूर्ण श्रृंखला के दौरान उन्होंने कुल नौ विकेट अपने नाम किए।
रफ्तार का जादू और अंतरराष्ट्रीय करियर के बड़े आंकड़े
उमेश यादव दुनिया के उन चुनिंदा गेंदबाजों में शुमार हैं जो निरंतर 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से गेंदबाजी करने की क्षमता रखते हैं। वर्ष 2015 के आईसीसी क्रिकेट विश्व कप के दौरान वह भारतीय दल की तरफ से सर्वाधिक विकेट चटकाने वाले गेंदबाज साबित हुए थे। उस टूर्नामेंट में उन्होंने कुल 18 विकेट हासिल किए थे। उनकी तीव्र गति का एक ऐतिहासिक उदाहरण भारत और ऑस्ट्रेलिया के मध्य खेले गए एक टेस्ट मुकाबले के दौरान सामने आया था, जब उन्होंने 91वें ओवर में इतनी खतरनाक गेंद फेंकी कि क्रीज पर 82 रन बनाकर खेल रहे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ग्लेन मैक्सवेल के बल्ले के दो टुकड़े हो गए थे। मैक्सवेल के हाथ में केवल बल्ले का हत्था रह गया था और वह स्वयं इस घटना पर अचरज में पड़कर हंसने लगे थे। जुलाई 2016 से जुलाई 2017 के अंतराल में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मैचों में 493.1 ओवर फेंके, जो उस अवधि में किसी भी भारतीय तेज गेंदबाज द्वारा डाले गए सबसे अधिक ओवर थे। अपने संपूर्ण करियर में उन्होंने 57 टेस्ट मैचों में प्रतिनिधित्व करते हुए 170 विकेट अपने नाम किए हैं। भारतीय पिचों की परिस्थितियों में उनका स्ट्राइक रेट और रिवर्स स्विंग का कौशल बेहद प्रभावी रहा है, जहां उन्होंने घरेलू मैदानों पर एक सौ से अधिक विकेट झटके हैं। एकदिवसीय प्रारूप में उन्होंने 75 मुकाबलों में 106 विकेट हासिल किए हैं। टी-20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में उन्हें तुलनात्मक रूप से कम अवसर मिले, जहां उन्होंने 9 मैचों में 12 विकेट लिए और उनका आखिरी टी-20 मुकाबला वर्ष 2022 में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध था। भारत के लिए उन्होंने अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मुकाबला जून 2023 में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल के रूप में खेला था। वर्तमान समय में वह घरेलू क्रिकेट में पंजाब की टीम की तरफ से खेल रहे हैं, जहां उन्होंने हाल ही में पांच विकेट लेकर अपनी शानदार फॉर्म का परिचय दिया है।