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बड़ा संकट: आठ सौ करोड़ के जेपीएनआईसी में छह हजार कुर्सियां गायब और कबाड़खाना बना परिसर
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है, जहां करोड़ों की लागत से तैयार किए गए जेपीएनआईसी की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है और वहां से हजारों कुर्सियां गायब मिली हैं।
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Ankit Yadav
04 सित 2026, 17:25
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र यानी जेपीएनआईसी की मौजूदा स्थिति ने सबको हैरान कर दिया है। कभी भव्यता और आधुनिक सुविधाओं के लिए चर्चा में रहने वाला यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब प्रशासनिक लापरवाही और देखरेख के अभाव में किसी वीरान कबाड़खाने में तब्दील होता नजर आ रहा है। लंबे समय से बंद पड़े इस परिसर के ताले जब निर्धारित तीस साल की लीज अवधि पूरी होने से पहले ही अचानक खोले गए, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी सन्न रह गए। प्रारंभिक निरीक्षण के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि परिसर के भीतर रखी लगभग छह हजार कुर्सियां पूरी तरह से गायब हो चुकी हैं, जिनका कोई अतापता नहीं मिल पा रहा है।
लाखों-करोड़ों की संपत्ति और बुनियादी ढांचे की बर्बादी
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस विशाल परियोजना को बनाने में करीब आठ सौ करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च किया गया था, जिसका उद्देश्य शहर में एक विश्वस्तरीय कन्वेंशन और सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करना था। हालांकि, राजनीतिक खींचतान, प्रशासनिक सुस्ती और कानूनी अड़चनों के कारण यह इमारत पिछले कई वर्षों से लगभग लावारिस हालत में पड़ी हुई थी। समय बीतने के साथ ही इस बहुमूल्य सरकारी संपत्ति का रखरखाव पूरी तरह बंद हो गया, जिसके परिणामस्वरूप असामाजिक तत्वों ने यहां डेरा डालना शुरू कर दिया और बेशकीमती सामानों की चोरी की घटनाएं बेरोकटोक होने लगीं।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे सवाल
परिसर के ताले खुलने के बाद जिस तरह से कुर्सियों और अन्य महत्वपूर्ण सामानों के गायब होने की पुष्टि हुई है, उससे सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा दाग लग गया है। जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सामानों का रातोंरात गायब हो जाना बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं हो सकता है। जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से बने इस सार्वजनिक ढांचे की ऐसी दुर्गति देखकर शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और विपक्षी दलों में भी गहरा आक्रोश व्याप्त है। लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब यह संपत्ति सरकार के अधीन थी और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आधिकारिक तौर पर तय थी, तो इतनी बड़ी तादाद में फर्नीचर और अन्य सामान कैसे गायब हो गया।
आगे की कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस गंभीर घटनाक्रम के तूल पकड़ने के बाद अब प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले की लीपापोती में जुट गए हैं। ऐसी चर्चाएं जोरों पर हैं कि इस बड़े पैमाने पर हुई चोरी और अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के वास्ते जल्द ही एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया जा सकता है। इसके अलावा, इस बहुचर्चित भवन को दोबारा से पटरी पर लाने और इसकी उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से योजनाएं बनाई जा रही हैं, ताकि जनता के अरबों रुपयों की और अधिक बर्बादी को रोका जा सके और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।