समस्तीपुर में युवती के साथ शर्मनाक घटना और चार गिरफ्तारियां बिहार के समस्तीपुर जिले की सड़कों पर महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा पर एक बार फिर बदनुमा दाग लगा है जहाँ एक स्थानीय लड़की के साथ खुलेआम अभद्रता किए जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में भारी रोष व्याप्त हो गया और आम जनता ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। मामले की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए अपनी टीमों का गठन किया और आरोपियों की धरपकड़ के लिए विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी। पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी जब उन्होंने इस घृणित कृत्य में संलिप्त पाए जाने वाले कुल 4 आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए इन सभी आरोपियों से पुलिस थाने में लगातार गहन पूछताछ की जा रही है ताकि इस पूरी वारदात की तह तक पहुँचा जा सके और इसमें शामिल अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके। इस कार्रवाई के बाद से जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि कुछ समय पहले ही जमुई जिले से भी इसी तरह की एक शर्मनाक घटना सामने आई थी जिसने पूरे राज्य की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया था और अब समस्तीपुर की इस ताज़ा घटना ने राज्य में महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है।
सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक इंतजामों पर उठते गंभीर सवाल राज्य की सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के खिलाफ होने वाले ऐसे असहज करने वाले अपराध इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा तंत्र और पुलिस गश्त कितनी कमजोर हो चुकी है। आमतौर पर जब भी ऐसे मामले प्रकाश में आते हैं तो प्रशासनिक अमले की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लंबे-चौड़े दावे किए जाते हैं परंतु धरातल पर स्थिति जस की तस बनी रहती है जिससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। कानून के जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की वारदातों को रोकने के लिए केवल त्वरित गिरफ्तारी ही काफी नहीं है बल्कि अदालतों में त्वरित सुनवाई और कठोर सजा का प्रावधान सुनिश्चित करना होगा ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जा सके। जमुई के बाद समस्तीपुर में घटी इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं का घर से बाहर निकलना और सुरक्षित सफर करना कितना जोखिम भरा होता जा रहा है। स्थानीय नागरिक समाज और विभिन्न राजनीतिक दल भी अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पुलिस प्रशासन को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की ओछी हरकतें करने की कोई भी दुस्साहस न कर सके और बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
त्वरित न्यायिक प्रक्रिया और भविष्य की सख्त कानूनी कार्रवाई समस्तीपुर में हुई इस निंदनीय घटना के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस इन चारों आरोपियों के खिलाफ अदालत में कितनी मजबूत चार्जशीट दाखिल करती है ताकि उन्हें जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके। आपराधिक मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से जुटाना बेहद महत्वपूर्ण होता है ताकि अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष मजबूत स्थिति में रहे और आरोपियों को किसी भी प्रकार की कानूनी ढील का फायदा न मिल सके। राज्य के गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय की ओर से भी सभी जिलों के अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाएं और मनचलों के खिलाफ विशेष अभियान चलाएं ताकि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर महिला सहायता प्रकोष्ठ और पुलिस चौकियों को भी अधिक सक्रिय करने की बात कही जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। इस पूरी घटना ने एक बार फिर इस विमर्श को तेज कर दिया है कि केवल कानूनों के होने मात्र से अपराधों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और सामाजिक मानसिकता में बदलाव लाने की दिशा में भी गंभीर प्रयास करने की सख्त आवश्यकता है।