अस्पताल की गंभीर लापरवाही और मरीज की परेशानी राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित हेल्थ सिटी हॉस्पिटल में हुई इस हैरान करने वाली घटना ने चिकित्सा व्यवस्था की गुणवत्ता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक मरीज अपने बाएं पैर के घुटने की गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए अस्पताल पहुंचा था ताकि उसकी सही समय पर उचित चिकित्सा हो सके। लेकिन अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में मौजूद लापरवाह डॉक्टरों और चिकित्सा टीम ने बिना किसी बुनियादी सावधानी के मरीज के ठीक-ठाक दाहिने घुटने की ही सर्जरी कर डाली। जब मरीज को होश आया और उसने अपने शरीर पर गलत निशान और गलत चीरे देखे, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। इस असहनीय शारीरिक पीड़ा और मानसिक आघात के बाद जब पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रशासन से इस गंभीर भूल का कारण जानना चाहा, तो डॉक्टरों ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय तीखा रुख अपना लिया। उन्होंने पीड़ित पक्ष को समझाने या सांत्वना देने के स्थान पर उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया, जिससे पूरे अस्पताल परिसर में भारी हंगामा मच गया और स्वास्थ्य सेवाओं की इस लचर कार्यप्रणाली पर आम जनता का गुस्सा फूट पड़ा।
चिकित्सा क्षेत्र में प्रोटोकॉल और जवाबदेही का संकट इस प्रकार की चिकित्सा त्रुटियां इस बात का स्पष्ट संकेत देती हैं कि बड़े और आधुनिक अस्पतालों में भी बुनियादी सुरक्षा मानकों और सर्जिकल सेफ्टी चेकलिस्ट की किस हद तक अनदेखी की जा रही है। स्वास्थ्य संस्थानों में यह एक स्थापित और अनिवार्य नियम होता है कि सर्जरी शुरू करने से पहले मरीज की पहचान, उसके मेडिकल रिकॉर्ड, एक्स-रे और ऑपरेशन वाले अंग की कई स्तरों पर सावधानीपूर्वक पुष्टि की जाती है ताकि इस तरह की जानलेवा और कष्टदायक गलतियों से बचा जा सके। लखनऊ जैसे बड़े महानगरों में जहां देश के कोने-कोने से लोग उन्नत इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, वहां इस तरह की घोर लापरवाही न केवल चिकित्सीय नैतिकता के खिलाफ है बल्कि यह कानूनन भी एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। हेल्थ सिटी हॉस्पिटल जैसी संस्थाओं में इस स्तर की चूक यह साबित करती है कि कई बार अस्पताल प्रबंधन मरीजों के स्वास्थ्य की तुलना में अपने व्यावसायिक हितों और जल्दबाजी को अधिक प्राथमिकता देते हैं। इस घटना ने एक बार फिर से यह रेखांकित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश के निजी और सरकारी चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की जवाबदेही तय करने के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभाग को बेहद सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में कोई भी अस्पताल इस तरह की अमानवीय लापरवाही दोहराने का दुस्साहस न कर सके।
कार्रवाई की मांग और प्रशासनिक मोर्चे पर हलचल हेल्थ सिटी हॉस्पिटल के इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद से ही लखनऊ के चिकित्सा जगत और आम नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है तथा सभी लोग इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पीड़ित परिवार और उनके समर्थकों ने अस्पताल प्रबंधन के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये और धौंस दिखाने की प्रवृत्ति के खिलाफ स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे मामलों में अमूनन यह देखा जाता है कि शुरुआती हंगामे के बाद अस्पताल प्रबंधन लीपापोती करने का प्रयास करता है, लेकिन इस बार मामला अत्यधिक तूल पकड़ चुका है क्योंकि गलत घुटने के ऑपरेशन से मरीज की शारीरिक विकलांगता और कष्ट और अधिक बढ़ गए हैं। जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर यह नैतिक दबाव बन गया है कि वे इस पूरे प्रकरण की त्वरित और निष्पक्ष जांच करवाएं तथा अस्पताल का लाइसेंस निलंबित करने जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार करें। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर लापरवाही के मामले में किस प्रकार के कठोर कदम उठाता है ताकि चिकित्सा पेशे की गरिमा बहाल हो सके और आम जनता का बड़े अस्पतालों पर से पूरी तरह से विश्वास न उठे।