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भावुक कहानी: झारखंड के एक एथलीट का वीडियो हुआ वायरल, देश के लिए चार स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब बेच रहे हैं सब्जी

झारखंड के एक प्रतिभाशाली एथलीट का जीवन संघर्ष इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां उन्होंने देश के लिए चार स्वर्ण पदक हासिल करने के बावजूद अपनी आजीविका चलाने के लिए सब्जी बेचने को मजबूर होने की कहानी साझा की है।

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Ankit Yadav
04 सित 2026, 16:00
भावुक कहानी: झारखंड के एक एथलीट का वीडियो हुआ वायरल, देश के लिए चार स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब बेच रहे हैं सब्जी
सोशल मीडिया के दौर में कब कौन सी तस्वीर या वीडियो लोगों का ध्यान खींच ले, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। हाल ही में इंटरनेट पर एक ऐसा ही वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसने खेल प्रेमियों और आम नागरिकों को अंदर से झकझोर कर रख दिया है। यह मामला देश के एक ऐसे खिलाड़ी से जुड़ा है जिसने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय पटल पर शानदार प्रदर्शन किया और भारत के लिए कुल चार स्वर्ण पदक अपने नाम किए। हालांकि, इसके बावजूद उनकी वर्तमान आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है और उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सड़क किनारे सब्जी बेचने जैसा कठिन कार्य करना पड़ रहा है।

प्रतिभा और विवशता के बीच की लंबी लड़ाई

इस वीडियो सामने आने के बाद खेल जगत और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। हमारे देश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन कई बार उचित मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और सरकारी प्रोत्साहन के अभाव में ये सितारे अंधेरे में खो जाते हैं। झारखंड के इस एथलीट की कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि देश के उन तमाम खिलाड़ियों की बानगी है जो विपरीत परिस्थितियों से लड़कर पदक तो जीत लाते हैं, लेकिन खेलकूद से संन्यास लेने के बाद या उसके दौरान भी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करने को मजबूर हो जाते हैं। जब एक स्वर्ण पदक विजेता को अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, तो यह खेल नीति और समाज दोनों के लिए एक बड़ा प्रश्नचिह्न बन जाता है। वीडियो के वायरल होने के बाद से ही विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर लोगों की संवेदनाएं उमड़ पड़ी हैं। इंटरनेट यूजर्स इस खिलाड़ी के समर्थन में आगे आ रहे हैं और संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने देश का मान बढ़ाया और तिरंगे की शान को पूरी दुनिया में ऊंचा किया, उसे इस तरह की लाचारी भरी जिंदगी नहीं बितानी चाहिए। इस प्रकार के मामलों में यदि समय रहते खेल मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन द्वारा मदद पहुंचाई जाए, तो न केवल इन खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सकता है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के युवाओं का खेलों के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा। उम्मीद की जा रही है कि इस वायरल वीडियो के माध्यम से यह दुखद गाथा सरकार और उच्च अधिकारियों तक पहुंचेगी, जिससे इस खिलाड़ी के जीवन स्तर को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जा सके। खेल और खिलाड़ियों के विकास के दावे करने वाले तंत्र के लिए यह एक आत्ममंथन का समय है कि कैसे मेधावी खिलाड़ियों को उनके सुनहरे दिनों के बाद भी एक गरिमापूर्ण जीवन प्रदान किया जा सके। जनता की यह प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि लोग आज भी देश के लिए पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों का सम्मान करते हैं और उनकी इस कठिन परिस्थिति में उनके साथ खड़े होने को तैयार हैं।
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