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तकनीकी निगरानी: माघ मेला-2027 में जल और बिजली आपूर्ति के लिए स्कारडा तकनीक का होगा इस्तेमाल
आगामी माघ मेला-2027 को पूरी तरह से हाईटेक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। संगम तट पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए जल और बिजली आपूर्ति प्रणालियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग स्कारडा (SCADA) तकनीक के जरिए की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत ठीक किया जा सके।
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Ankit Yadav
04 सित 2026, 13:02
उत्तर प्रदेश के पवित्र संगम तट पर आयोजित होने वाले आगामी माघ मेले को लेकर प्रशासन ने अभी से ही अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मेले के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया है। इसी कड़ी में मेला क्षेत्र के भीतर जल आपूर्ति और विद्युत वितरण व्यवस्था को पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत और पारदर्शी बनाने की योजना तैयार की गई है, जिसके तहत एडवांस्ड तकनीक का पहरा रहेगा।
रियल टाइम मॉनिटरिंग और त्वरित समाधान
मेला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2027 के इस आयोजन में पानी और बिजली के प्रबंधन के लिए स्कारडा यानी 'स्कैडा' प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इस आधुनिक तकनीक की मदद से कंट्रोल रूम से ही पूरे क्षेत्र की जल और विद्युत आपूर्ति पर हर वक्त सीधी नजर रखी जा सकेगी। यदि किसी भी स्थान पर लाइन में फॉल्ट आता है, वोल्टेज की कोई समस्या होती है या फिर पानी की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा उत्पन्न होती है, तो इसकी सूचना तुरंत मुख्य नियंत्रण कक्ष को मिल जाएगी।
इस स्वचालित निगरानी प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी या गड़बड़ी का पता चलते ही संबंधित विभाग और मैदानी अमला तुरंत हरकत में आ जाएगा। इससे शिकायतों के समाधान में लगने वाला समय नगण्य हो जाएगा और मेला क्षेत्र में निर्बाध रूप से बिजली और पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जा सकेगी। पारंपरिक व्यवस्थाओं में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए इस डिजिटल पहल को एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।
भव्य और सुरक्षित आयोजन की तैयारी
संगम की रेती पर बसने वाली अस्थायी नगरी हर साल देश-विदेश के करोड़ों साधु-संतों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। इतने बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और प्रबंधकीय चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक का सहारा लेना अब अनिवार्य हो गया है। आने वाले समय में इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बैठकों का दौर भी शुरू हो चुका है, ताकि समय रहते सभी उपकरणों और नेटवर्क को दुरुस्त किया जा सके।
स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के हाईटेक इंतजामों से न सिर्फ व्यवस्थाओं में कसावट आएगी, बल्कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या बड़ी असुविधा से भी प्रभावी ढंग से बचा जा सकेगा। माघ मेला-2027 को तकनीक के मोर्चे पर एक मिसाल बनाने के लिए इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने रूपरेखा तैयार करना शुरू कर दिया है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।