उदावा गांव तक पहुंच का कठिन संघर्ष
मंगलवार का दिन चकराता ब्लॉक के उदावा गांव के रहने वाले अनिल चौहान के लिए बेहद यादगार रहा, क्योंकि इसी दिन उनका विवाह बुल्हाड़ गांव की शर्मिला के साथ संपन्न हुआ। विवाह की रस्में पूरी करने के लिए शर्मिला को अपने मायके से ससुराल तक का सफर तय करना था, लेकिन इस विवाह की चर्चा चारों ओर हो रही है। इसकी मुख्य वजह गांव में सड़क मार्ग का न होना है, जिसने इस शादी को एक चुनौतीपूर्ण अभियान में बदल दिया। दुल्हन को बारात लेकर ससुराल पहुंचने के लिए लोखंडी तक तो वाहन का सहारा मिला, लेकिन उसके आगे का रास्ता पूरी तरह से पैदल था। शर्मिला ने अपने पूरे श्रृंगार और शादी के लिबास में ही इस दुर्गम पहाड़ी रास्ते को पार करने का निर्णय लिया। लगभग 18 किलोमीटर की लंबी दूरी को पैदल तय करते हुए दुल्हन ने चार घंटे का समय बिताया। यह घटना न केवल इस जोड़े के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए एक बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है, जहाँ लोग सड़क की कमी के कारण होने वाली समस्याओं पर विचार कर रहे हैं।
सड़क सुविधा के बिना बारात का सफर
विवाह के आयोजन के दौरान शर्मिला और अनिल चौहान के परिजनों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि विकास की मुख्य धारा से उदावा गांव अब भी अछूता है। बारात के साथ दुल्हन का लोखंडी पहुंचना सामान्य था, लेकिन वहां से आगे के 18 किलोमीटर का सफर किसी भी वाहन के लिए असंभव था। जानकारी के अनुसार शर्मिला मंगलवार को वाहन के जरिए लोखंडी तक पहुंची थी, जहां से आगे का रास्ता केवल पहाड़ी पगडंडियों से होकर गुजरता था। सड़क न होने की वजह से दुल्हन और बारात में शामिल लोगों को चार घंटे तक लगातार पैदल चलना पड़ा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आजादी के इतने दशकों बाद भी उदावा गांव में सड़क सुविधा का न पहुंचना बड़ी प्रशासनिक विफलता है, जिसका सीधा असर सामाजिक कार्यक्रमों पर पड़ता है। दुल्हन शर्मिला ने जिस धैर्य के साथ 18 किलोमीटर का पहाड़ी सफर तय किया, उसकी प्रशंसा हर कोई कर रहा है, लेकिन इसके पीछे की कड़वी सच्चाई यह है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में आज भी लोग दुर्गम रास्तों पर चलने को मजबूर हैं।
बुनियादी ढांचे की कमी का खामियाजा
उदावा गांव के निवासियों के लिए सड़क सुविधा का अभाव केवल एक शादी का मुद्दा नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की एक बड़ी चुनौती है। दशकों बीत जाने के बाद भी यहां सड़क न पहुंचना ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय है, जिसका खामियाजा लोगों को शादी-विवाह जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर उठाना पड़ता है। जब भी गांव में कोई उत्सव होता है या किसी को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल जाना होता है, तो उन्हें इसी प्रकार के दुर्गम रास्तों से गुजरना पड़ता है। शर्मिला की शादी इस समस्या का एक ताजा उदाहरण है, जहां एक दुल्हन को अपनी शादी के दिन भारी मशक्कत करनी पड़ी। यह घटना स्पष्ट करती है कि चकराता के दूरदराज के क्षेत्रों में अभी भी विकास की पहुंच बहुत सीमित है। ग्रामीण लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें भविष्य में इस तरह की कठिन यात्रा न करनी पड़े। शासन और प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि गांव के लोगों का जीवन आसान हो सके और उन्हें बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े। यह शादी केवल एक मिलन का उत्सव नहीं बल्कि क्षेत्र की बदहाली की एक मूक गवाही भी है।