ग्रामीण अंचलों में सजे थे पंडाल
जिला मुख्यालय के ग्रामीण क्षेत्रों के भीतर कुल 2500 अलग-अलग बिंदुओं पर दुर्गा पूजा पंडालों का निर्माण किया गया था। इन सभी पवित्र स्थानों पर पूरे नौ दिनों तक विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती रही। नवरात्र पर्व का अनुष्ठान समाप्त होने पर बुधवार को दोपहर के समय से ही मूर्तियों को वाहनों और अन्य जरूरी माध्यमों के जरिए तय किए गए विसर्जन स्थलों की ओर ले जाने का सिलसिला शुरू कर दिया गया था। शाम ढलने के बाद और फिर पूरी रात विभिन्न इलाकों से मां दुर्गा की प्रतिमाएं निर्धारित घाटों पर लगातार पहुंचती रहीं। इन सभी धार्मिक आयोजनों को पूरी तरह से सुरक्षित माहौल में पूरा करने के लिए स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के कड़े और व्यापक इंतजाम किए गए थे। सभी प्रमुख विसर्जन स्थलों पर विशेष पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा या अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
घाटों पर अधिकारियों की रही निगरानी
संवेदनशील स्थानों और मुख्य घाटों पर पुलिसकर्मियों की भारी तैनाती सुनिश्चित की गई थी ताकि कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे। तमाम वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग-अलग घाटों का व्यक्तिगत रूप से मुआयना किया और वहां की सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों को पूरी तरह से मुस्तैद और सतर्क रहने के सख्त निर्देश भी दिए गए थे। मिल्कीपुर क्षेत्र के अंतर्गत उपजिलाधिकारी पवन कुमार शर्मा और क्षेत्राधिकारी पीयूष पाल ने खुद मौके पर पहुंचकर विसर्जन व्यवस्था का पूरा मुआयना किया। इसके अलावा पड़ोसी जिले अमेठी के आमघाट पर भी अयोध्या क्षेत्र की मूर्तियों का विसर्जन किया गया। इस विशेष स्थल पर अमेठी और कुमारगंज थाने की पुलिस संयुक्त रूप से मुस्तैद रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाती रही। रात का वक्त काफी बीत जाने के बाद भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी विसर्जन स्थलों पर लगातार सक्रिय रूप से डटे रहे और पूरी प्रक्रिया पर अपनी पैनी नजर बनाए रखी।
शांतिपूर्ण माहौल में पूरा हुआ विसर्जन
प्रशासन द्वारा किए गए कड़े सुरक्षा प्रबंधों और अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी के कारण मूर्तियों को जल में प्रवाहित करने की यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। नौ दिनों के लंबे अनुष्ठान के बाद जब भक्त अपनी आराध्य देवी की मूर्तियों को विदा करने पहुंचे तो उन्हें किसी भी प्रकार की अव्यवस्था का सामना नहीं करना पड़ा। पुलिस और प्रशासनिक अमले की मुस्तैदी की वजह से ग्रामीण इलाकों से लेकर मुख्य घाटों तक हर जगह कानून और शांति व्यवस्था का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित किया गया। रात के एक बजे तक अलग-अलग घाटों पर लगभग 1000 प्रतिमाओं को नदियों में प्रवाहित करने का यह सिलसिला पूरी तरह से शांति और अनुशासन के साथ चलता रहा। सभी संबंधित थानों की पुलिस ने आपसी तालमेल बनाकर इस बड़े धार्मिक आयोजन को सकुशल संपन्न कराया जिससे आम नागरिकों और श्रद्धालुओं ने भी राहत की सांस ली और प्रशासन के इस प्रबंध की सराहना की।