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गंभीर लापरवाही: झांसी के बिजौली में प्राथमिक विद्यालय के पास फैली भारी गंदगी

झांसी जिले के बिजौली क्षेत्र में स्थित प्राथमिक विद्यालय के ठीक पास भारी गंदगी जमा होने से स्थानीय लोगों और बच्चों के परिजनों में भारी आक्रोश है। जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता के कारण यहाँ स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। जनता की समस्याओं के समाधान के लिए चुने गए जनप्रतिनिधि भी इस गंभीर मुद्दे पर फोन नहीं उठा रहे हैं जिससे लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है।

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Ankit Yadav
20 सित 2026, 17:39
गंभीर लापरवाही: झांसी के बिजौली में प्राथमिक विद्यालय के पास फैली भारी गंदगी

विद्यालय परिसर के बाहर पसरी भीषण गंदगी झांसी जिले के अंतर्गत आने वाले बिजौली इलाके में शिक्षा ग्रहण करने वाले छोटे-छोटे बच्चों के भविष्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ किया जा रहा है क्योंकि यहाँ के प्राथमिक विद्यालय भवन के बिल्कुल समीप कचरे का अंबार लगा हुआ है। इस बदहाली के कारण स्कूल आने-जाने वाले मासूम विद्यार्थियों को रोजाना न केवल भयानक दुर्गंध का सामना करना पड़ता है बल्कि उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर बीमारियां फैलने का लगातार खतरा मंडराता रहता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन की तरफ से इस ओर लंबे समय से पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है जिसके चलते यहाँ की साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। इस बाबत जब स्थानीय लोगों ने समस्या के तुरंत निस्तारण हेतु संबंधित क्षेत्र के सभासद से संपर्क साधने का बार-बार प्रयास किया तो उनकी तरफ से फोन रिसीव नहीं किया गया जिससे जनता का गुस्सा और अधिक फूट पड़ा है और लोग अपने आपको पूरी तरह से असहाय महसूस कर रहे हैं। इस प्रकार की लापरवाह कार्यशैली से नागरिकों के मन में प्रशासन के प्रति भारी रोष व्याप्त हो गया है और वे जल्द से जल्द इस विकट परिस्थिति से निजात पाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं ताकि बच्चों को स्वच्छ माहौल मिल सके।

स्थानीय निकायों और अधिकारियों की उदासीनता भारत के विभिन्न ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में स्थित सरकारी शिक्षण संस्थानों के आसपास स्वच्छता बनाए रखना स्थानीय नगर निकायों और पंचायतों की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है ताकि वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को एक स्वस्थ और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण मिल सके। परंतु जमीनी हकीकत यह है कि अक्सर प्रशासनिक सुस्ती और अधिकारियों की उदासीनता के कारण विद्यालयों के बाहर कचरा प्रबंधन पूरी तरह से फेल नजर आता है। जब कभी इस तरह की गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं तो स्थानीय जनता अपनी फरियाद लेकर अपने वार्ड के सभासद या पार्षदों से संपर्क करती है ताकि वे प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाकर जल्द से जल्द सफाई अभियान चलवा सकें। इसके विपरीत जब जनप्रतिनिधि ही आम जनता के फोन कॉल उठाना बंद कर देते हैं या उनकी शिकायतों पर किसी भी प्रकार का ध्यान नहीं देते हैं तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास डगमगाने लगता है। इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकतें प्रशासनिक तंत्र में व्याप्त लालफीताशाही और जवाबदेही की कमी को स्पष्ट रूप से उजागर करती हैं। शिक्षण संस्थानों के समीप इस तरह की गंदगी का जमा होना न केवल स्वच्छता अभियानों की पोल खोलता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी बुनियादी सुविधाओं के प्रति जिम्मेदार लोग कितने लापरवाह और संवेदनहीन बने हुए हैं।

बढ़ता जनआक्रोश और तत्काल समाधान की मांग बिजौली के इस प्राथमिक विद्यालय के पास फैली गंदगी और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों द्वारा फोन न उठाए जाने की इस घटना ने इलाके के लोगों को आंदोलित कर दिया है। यदि समय रहते इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो स्थानीय अभिभावक और नागरिक मिलकर एक बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना सकते हैं ताकि प्रशासन की नींद खुल सके। लोग यह मांग कर रहे हैं कि जिला प्रशासन इस मामले का स्वतः संज्ञान ले और तुरंत प्रभाव से विद्यालय के आसपास के पूरे इलाके की विशेष सफाई करवाते हुए कचरे का उचित उठान सुनिश्चित करे। इसके साथ ही, जन प्रतिनिधियों का इस प्रकार जनता के प्रति उदासीन रवैया अपनाना उनके राजनीतिक भविष्य और साख पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है, जिसका खामियाजा उन्हें आने वाले समय में भुगतना पड़ सकता है। इस प्रकार की घटनाओं से यह सबक मिलता है कि स्थानीय निकायों को अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लानी होगी और जनता के फोन तथा शिकायतों का त्वरित जवाब देना होगा ताकि किसी भी आपात स्थिति या गंदगी जैसी समस्या से तुरंत निपटा जा सके और बच्चों की पढ़ाई व स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

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