धोबिनपुरवा-टपरी मार्ग पर बाढ़ का भयंकर कहर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के अंतर्गत आने वाले धोबिनपुरवा-टपरी मार्ग पर प्राकृतिक आपदा के कारण हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं और लगातार बढ़ते जलस्तर ने इस पूरे रास्ते को जलमग्न कर दिया है। स्थिति यह हो चुकी है कि सड़क का नामोनिशान पानी में छिप गया है और मार्ग पर बनी पुलिया के ऊपर से तेज गति से पानी का बहाव हो रहा है। ऐसे खतरनाक और संकटपूर्ण माहौल के बीच छोटे-छोटे स्कूली बच्चों को अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए इसी उफनते रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा है, जो किसी भी वक्त किसी बड़ी अनहोनी को न्योता दे सकता है। अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों की सांसे इन मासूमों के रोजाना स्कूल आने-जाने के दौरान अटकी रहती हैं क्योंकि जरा सी भी चूक या पैर फिसलने की स्थिति में तेज बहाव उन्हें अपने साथ बहाकर ले जा सकता है। प्रशासनिक स्तर पर अभी तक इस गंभीर समस्या का कोई ठोस और तात्कालिक समाधान नजर नहीं आया है, जिसके चलते बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही चल रही है।
ग्रामीण इलाकों में जलभराव और आवागमन का संकट ग्रामीण क्षेत्रों में जब भी इस प्रकार की बाढ़ जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं, तो सबसे पहले परिवहन और संपर्क मार्ग पूरी तरह से ठप हो जाते हैं, जिसका सीधा और सबसे बुरा प्रभाव शिक्षण संस्थानों तक जाने वाले विद्यार्थियों पर पड़ता है। भारत के ग्रामीण अंचलों में सुरक्षा मानकों और वैकल्पिक मार्गों की भारी कमी के कारण लोगों को अपने दैनिक कार्यों और बच्चों को पढ़ाई के लिए ऐसे ही जानलेवा रास्तों को चुनने के लिए विवश होना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर मजबूत बुनियादी ढांचे और पक्के पुलों के अभाव के कारण हल्की सी मूसलाधार बारिश या नदियों का जलस्तर बढ़ने से ही रास्ते कट जाते हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा इस प्रकार के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बैरिकेडिंग या निगरानी के पुख्ता इंतजाम न किए जाने से समस्या और अधिक विकराल रूप धारण कर लेती है। जब तक जमीनी स्तर पर ग्रामीण सड़कों की ऊंचाई और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक हर साल मानसून या बाढ़ के सीजन में स्थानीय जनता और छात्रों को ऐसे ही अमानवीय और जोखिम भरे हालातों का सामना करना पड़ता रहेगा।
अभिभावकों की बढ़ती चिंता और प्रशासनिक कदम इस प्रकार की डरावनी तस्वीरों और घटनाओं के सामने आने के बाद स्थानीय अभिभावकों और नागरिकों के भीतर भारी रोष और चिंता का माहौल साफ तौर पर देखा जा सकता है। हर कोई यही मांग कर रहा है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस मार्ग पर तत्काल प्रभाव से आवाजाही रोकी जाए और वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग पर भी अब यह नैतिक दबाव बढ़ गया है कि वे इस प्रकार के बाढ़ प्रभावित रास्तों पर विशेष निगरानी रखें ताकि किसी भी संभावित हादसे को समय रहते टाला जा सके। यदि समय रहते इन रास्तों पर पुलिस बल या गोताखोरों की तैनाती नहीं की गई और बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन का प्रबंध नहीं हुआ, तो स्थिति हाथ से निकल सकती है। आने वाले दिनों में यदि जलस्तर कम नहीं होता है, तो स्कूलों को कुछ समय के लिए बंद रखने का निर्णय भी लेना पड़ सकता है ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो सके।