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जानलेवा संकट: बाराबंकी में साढ़े पांच महीने में सांपों के डसने से 69 लोगों की मौत

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सांपों के काटने से होने वाली मौतों के आंकड़े ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए अब ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है।

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Ankit Yadav
20 सित 2026, 16:48
जानलेवा संकट: बाराबंकी में साढ़े पांच महीने में सांपों के डसने से 69 लोगों की मौत

सांप के काटने से लगातार बढ़ रहे हैं आंकड़े उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में पिछले कुछ समय से विषैले जीवों के हमलों की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे आम जनता के बीच भय का माहौल उत्पन्न हो गया है। प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष केवल साढ़े पांच महीनों की छोटी सी अवधि के भीतर ही अलग-अलग हादसों में कुल 69 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यह इलाका इस प्राकृतिक खतरे की दृष्टि से बेहद संवेदनशील स्थिति में पहुंच चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर और आम नागरिक इन वारदातों का सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा जुटाए गए इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है और अब इस जानलेवा समस्या पर काबू पाने के लिए नए सिरे से मंथन किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी अनहोनी घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

ग्रामीण इलाकों में शुरू हुआ विशेष जागरूकता अभियान इस बढ़ती हुई आपदा को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने बाराबंकी के कोने-कोने में विशेष जन-जागरूकता अभियान का आगाज कर दिया है। इस अभियान के तहत गांवों के भीतर लोगों को यह समझाया जा रहा है कि खेतों या झाड़ियों के आसपास चलते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए तथा अंधेरे में आवाजाही करते वक्त किन सावधानियों को बरतना अनिवार्य है। जानकारों का मानना है कि बरसात के दिनों में और उसके आसपास भूमि के भीतर रहने वाले जीव अपने बिलों में पानी भरने के कारण बाहर निकल आते हैं, जिससे इंसानों के साथ उनका आमना-सामना होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में स्थानीय निवासियों को यह प्रशिक्षित किया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति को कोई जहरीला जीव डस ले, तो बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल का रुख करना चाहिए न कि किसी प्रकार के अंधविश्वास या झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ना चाहिए। चिकित्सा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि समय पर एंटीवेनम मिलने से मरीज की जान बचाए जाने की संभावना शत-प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

प्रशासनिक सतर्कता और भविष्य की कार्ययोजना बढ़ते हादसों को मध्यनजर रखते हुए बाराबंकी के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में जीवन रक्षक औषधियों तथा एंटीवेनम इंजेक्शनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। चिकित्सा कर्मियों को यह सख्त हिदायत दी गई है कि इस प्रकार के आपातकालीन मामलों में आने वाले हर एक मरीज का तुरंत और बिना किसी विलंब के उपचार शुरू किया जाए ताकि किसी की जान खतरे में न पड़े। इसके साथ ही पंचायत स्तर पर मुनादी करवाकर और दीवारों पर पेंटिंग के जरिए लोगों को जागरूक करने के तमाम संभव प्रयास किए जा रहे हैं ताकि ग्रामीण समाज में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के प्रति भरोसा मजबूत हो सके। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग स्वयं कर रहे हैं और विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रधानों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी अपील की गई है कि वे इस जनहित के कार्य में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं। उम्मीद जताई जा रही है कि इन मिले-जुले और ठोस प्रयासों के माध्यम से आने वाले दिनों में इन दर्दनाक हादसों पर अंकुश लगाने में काफी हद तक सफलता हासिल हो सकेगी।

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