टिकैतनगर में हरिशंकरी अभियान के तहत रोपे गए पेड़ उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आने वाले टिकैतनगर क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है जिसके तहत हरिशंकरी अभियान का आयोजन किया गया। इस विशेष अभियान का नेतृत्व करते हुए चेयरमैन जगदीश प्रसाद गुप्ता ने खुद आगे बढ़कर पौधारोपण किया और प्रकृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। इस कार्यक्रम के दौरान बरगद, पीपल और पाकड़ जैसे पारंपरिक और अत्यधिक ऑक्सीजन देने वाले पवित्र वृक्षों के पौधे रोपे गए। स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण प्रेमियों की मौजूदगी में यह पूरा कार्यक्रम संपन्न हुआ जिसमें इन विशिष्ट वृक्षों के रोपण पर विशेष जोर दिया गया। चेयरमैन ने खुद मिट्टी में पौधे रोपकर उपस्थित लोगों को प्रकृति की रक्षा का संदेश दिया और इस बात पर बल दिया कि हमारी संस्कृति में इन पेड़ों का विशेष धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व रहा है जो पर्यावरण को शुद्ध करने में सबसे आगे माने जाते हैं।
हरिशंकरी अभियान और भारतीय संस्कृति में वृक्षों का महत्व भारतीय परंपरा और संस्कृति में बरगद, पीपल और पाकड़ के पेड़ों के समूह को हरिशंकरी कहा जाता है जिसे अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना गया है। आधुनिक विज्ञान भी इस बात की पुष्टि करता है कि ये तीनों प्रजातियां पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन का उत्सर्जन करने में सबसे अधिक प्रभावी होती हैं। उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में इस तरह के अभियानों के माध्यम से लोगों को अपने आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाता है ताकि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटा जा सके। स्थानीय निकायों और सामुदायिक स्तर पर इस प्रकार के आयोजनों से नागरिकों के मन में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना जागृत होती है। प्रशासनिक स्तर पर जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ऐसे अभियानों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होते हैं तो समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है और आम जनता भी बढ़-चढ़कर इस तरह की रचनात्मक पहलों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित होती है।
वृक्षारोपण अभियानों का दूरगामी प्रभाव और भविष्य की रूपरेखा इस प्रकार के पौधारोपण कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित वातावरण तैयार करना होता है। चेयरमैन जगदीश प्रसाद गुप्ता द्वारा टिकैतनगर में चलाए गए इस अभियान से स्थानीय नागरिकों में पेड़ों की देखभाल करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक नई जिम्मेदारी की भावना पैदा हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पौधे लगा देना ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि उनकी नियमित देखरेख, पानी देना और उन्हें सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है ताकि वे बड़े होकर एक मजबूत वृक्ष का रूप ले सकें। इस तरह के आयोजनों के सफल होने से न केवल स्थानीय क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होता है बल्कि भूजल स्तर में सुधार और जैव विविधता को बढ़ावा मिलने में भी काफी मदद मिलती है। आने वाले दिनों में इस अभियान को और अधिक विस्तार देने की योजना बनाई जा सकती है ताकि अधिक से अधिक खाली जमीनों और सार्वजनिक स्थलों पर हरियाली का दायरा लगातार बढ़ाया जा सके।