उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में विकास कार्यों के प्रति घोर उदासीनता और लापरवाही बरतने वाले सत्रह पंचायत सचिवों के खिलाफ जिला प्रशासन ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इन सभी पंचायत सचिवों का वेतन अगले आदेश तक रोक दिया गया है क्योंकि इन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए आवंटित धन का उपयोग निर्धारित समय सीमा के भीतर नहीं किया था। शासन और प्रशासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी विकास के लिए लगातार धन मुहैया कराया जा रहा है, लेकिन मैदानी स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की सुस्ती के कारण योजनाओं का लाभ आम जनता तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। इसी के मद्देनजर उच्च अधिकारियों ने वित्तीय वर्ष के दौरान धन खर्च न किए जाने के मामलों की समीक्षा करते हुए यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, स्वच्छता अभियान, पेयजल व्यवस्था और अन्य जनहित के कार्यों को गति देने के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर भारी भरकम बजट जारी किया जाता है। स्थानीय स्तर पर इन सभी विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की मुख्य जिम्मेदारी पंचायत सचिवों और ग्राम विकास अधिकारियों की होती है। हालांकि पिछले कुछ समय से यह शिकायतें लगातार मिल रही थीं कि कई पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आए पैसे का एक बड़ा हिस्सा खातों में ही यूं ही पड़ा हुआ है और उसे खर्च करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने इस वित्तीय अनुशासनहीनता को बेहद गंभीरता से लिया है। विकास कार्यों में इस प्रकार की देरी न केवल ग्रामीण इलाकों के विकास को बाधित करती है बल्कि सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान लगाती है, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिले के अन्य प्रशासनिक हलकों और कर्मचारियों के बीच भारी हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के कड़े कदमों से मैदानी स्तर पर तैनात कर्मचारियों में वित्तीय कार्यों के प्रति जवाबदेही तय होगी और वे विकास कार्यों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए बाध्य होंगे। जिन सत्रह पंचायत सचिवों का वेतन रोका गया है, उन्हें चेतावनी दी गई है कि वे जल्द से जल्द अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं और रुके हुए विकास कार्यों को युद्ध स्तर पर पूरा कराएं। यदि भविष्य में भी इसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ और भी अधिक कठोर विभागीय जांच और निलंबन जैसी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन की इस सख्ती से अब उम्मीद जताई जा रही है कि क्षेत्र में विकास कार्यों की गति तेज होगी और जनता को योजनाओं का लाभ जल्द मिलना शुरू होगा।