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प्रशासनिक लापरवाही: शाही खैरात खाना बाजार खाला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह विफल, पंद्रह दिनों से कूड़ा नहीं उठा

लखनऊ के बाजार खाला इलाके में शाही खैरात खाना क्षेत्र के भीतर स्वच्छता सेवाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। पिछले पंद्रह दिनों से कचरे का उठान न होने के कारण स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

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Ankit Yadav
26 सित 2026, 11:46
प्रशासनिक लापरवाही: शाही खैरात खाना बाजार खाला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह विफल, पंद्रह दिनों से कूड़ा नहीं उठा

शाही खैरात खाना बाजार खाला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था चरमराई उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अंतर्गत आने वाले बाजार खाला क्षेत्र के शाही खैरात खाना मोहल्ले में स्वच्छता और साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है, जिससे स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि नगर निगम की लचर कार्यप्रणाली के कारण पिछले 15 दिनों से लगातार कचरा उठाने वाली गाड़ियां या सफाई कर्मचारी इस इलाके का रुख नहीं कर रहे हैं। इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के परिणामस्वरूप जगह-जगह कचरे के बड़े-बड़े अंबार लग गए हैं, जिनमें से भीषण दुर्गंध उठने लगी है। इस गंदे कचरे के ढेर पर मक्खी, मच्छर और आवारा जानवर मंडराते रहते हैं, जिससे पूरे इलाके का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार मौखिक रूप से अपनी शिकायतें दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है। व्यापारिक गतिविधियों के केंद्र माने जाने वाले इस क्षेत्र में इस तरह की गंदगी फैलने से ग्राहकों का आना-जाना भी कम हो गया है, जिससे स्थानीय कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निकायों की कार्यशैली और स्वच्छता प्रबंधन के मायने किसी भी घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र में नियमित रूप से कचरा उठाना और साफ-सफाई बनाए रखना नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है, ताकि नागरिकों को एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण मिल सके। जब इस तरह के आवश्यक नागरिक कार्यों में भारी लापरवाही बरती जाती है, तो इसका सीधा असर स्थानीय व्यापार, पर्यटन और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। बाजार और रिहायशी इलाकों के मिलने-जुले स्वरूप वाले क्षेत्रों में कचरे का समय पर निस्तारण न होना न केवल संक्रामक बीमारियों को बुलावा देता है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था की पोल भी खोलता है। नगर निगम प्रशासन को शहर के हर कोने से ठोस कचरा संग्रहण के लिए नियमित रूप से संसाधनों का आवंटन करना चाहिए और मैदानी स्तर पर कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करनी चाहिए। जब निगरानी तंत्र कमजोर पड़ जाता है और ठेकेदारों या कर्मचारियों पर उचित प्रशासनिक नियंत्रण नहीं रहता, तब इस प्रकार की अव्यवस्थाएं जन्म लेती हैं। इस घटना ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित कर दिया है कि कागजी दावों और धरातल की वास्तविकता के बीच कितना बड़ा अंतर है, जिसे पाटने के लिए सख्त प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जवाबदेही तय किए जाने की सख्त आवश्यकता है।

संभावित स्वास्थ्य संकट और सुधार के लिए उठाये जाने वाले कदम लगातार पंद्रह दिनों तक कचरा न उठाए जाने के कारण शाही खैरात खाना बाजार खाला क्षेत्र में जिस तरह के हालात बने हुए हैं, वे आने वाले समय में एक बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकते हैं। इस क्षेत्र में मच्छरों के पनपने और दूषित वातावरण के फैलने से मलेरिया, डेंगू और वायरल फीवर जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों की सेहत पर सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों और व्यापार मंडलों ने अब इस स्थिति के खिलाफ लामबंद होकर उच्च अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने का मन बना लिया है। यदि समय रहते नगर निगम प्रशासन ने इस दिशा में त्वरित कार्रवाई करते हुए विशेष सफाई अभियान नहीं चलाया और जमा हुए कचरे को पूरी तरह से साफ नहीं किया, तो नागरिक सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए विवश हो सकते हैं। इस मामले ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि जब तक स्थानीय प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह नहीं बनता और अपनी ड्यूटी का निर्वहन पूरी ईमानदारी से नहीं करता, तब तक नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं के लिए यूं ही संघर्ष करना पड़ता रहेगा।

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