दरोगा की अवैध वसूली और डराने का पूरा मामला बिजनौर जिले के अंतर्गत सामने आए इस ताजा मामले में एक दरोगा की अनुशासनहीनता और भ्रष्ट आचरण की पोल खुली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक पति और पत्नी के बीच किसी बात को लेकर आपसी विवाद चल रहा था और इसी पारिवारिक मामले में एक स्थानीय युवक को बीच में घसीटा गया। संबंधित दरोगा ने इस विवाद का फायदा उठाते हुए युवक को गंभीर परिणामों की धमकी दी और उसे कानूनी पचड़े में फंसाने का डर दिखाया। डरे-सहमे युवक से समझौते और मामले को रफा-दफा करने के एवज में 21 हजार रुपये की अवैध रकम वसूल ली गई। पीड़ित युवक ने जब इस गैरकानूनी वसूली का विरोध करने की कोशिश की तो उसे और अधिक प्रताड़ित किया गया। इस घटना की भनक लगते ही प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई क्योंकि यह सीधे तौर पर वर्दी के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का एक स्पष्ट उदाहरण है। आम जनता की सुरक्षा और न्याय की जिम्मेदारी संभालने वाले जब खुद इस प्रकार की अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं तो कानून व्यवस्था पर से आम नागरिकों का भरोसा डगमगाने लगता है। इस पूरी घटना के सामने आने के बाद से ही पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी हरकत में आ गए हैं और मामले की सत्यता की गहराई से जांच की जा रही है।
पारिवारिक विवादों के निपटारे में पुलिसिया दखल और भ्रष्टाचार समाज में पति-पत्नी के आपसी विवाद और घरेलू कलह आम बात होती है, जिन्हें आमतौर पर परिवार परामर्श केंद्रों या कानूनी माध्यमों से सुलझाया जाता है। परंतु कई बार स्थानीय स्तर पर तैनात पुलिसकर्मी ऐसे मामलों का गलत फायदा उठाकर अपनी निजी कमाई का जरिया बना लेते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि किस प्रकार थानों और चौकियों में बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हैं। जब आम लोग किसी मुसीबत या विवाद में फंसते हैं तो वे मदद के लिए पुलिस के पास जाते हैं, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो पीड़ितों की मुश्किलें और अधिक बढ़ जाती हैं। इस प्रकरण में भी दरोगा द्वारा जिस प्रकार से दबाव बनाकर रकम वसूली गई, वह पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है। ऐसे मामलों में अक्सर पीड़ित व्यक्ति डर के मारे आवाज नहीं उठा पाते हैं क्योंकि उन्हें पुलिसिया उत्पीड़न का निरंतर भय सताता रहता है। इस तरह की घटनाएं न केवल पुलिस महकमे की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि शासन प्रशासन के उन दावों की भी पोल खोलती हैं जिनमें भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी व्यवस्था देने की बात कही जाती है। इस प्रकार के कृत्यों से समाज में भय का माहौल बनता है और न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास कमजोर होता है, जो कि किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक विषय है।
विभागीय जांच और आगे की कार्रवाई की सुगबुगाहट इस प्रकार की गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद अब पुलिस के उच्च अधिकारियों पर भी नैतिक दबाव बढ़ गया है कि वे त्वरित और सख्त कार्रवाई करें। स्थानीय सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार इस मामले में प्रारंभिक स्तर की गोपनीय जांच शुरू कर दी गई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपी दरोगा ने किस परिस्थिति में और किन माध्यमों से यह रकम वसूली थी। यदि विभागीय जांच में दरोगा दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कदम उठाए जाने की पूरी संभावना है। उत्तर प्रदेश पुलिस के उच्च अधिकारी अक्सर यह दावा करते हैं कि भ्रष्ट और अयोग्य पुलिसकर्मियों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है, और ऐसे मामलों में निलंबन जैसी बड़ी कार्रवाई देखने को मिलती है। इस घटना के तूल पकड़ने के बाद से पीड़ित पक्ष और स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कब और क्या ठोस कार्रवाई अमल में लाई जाती है। इस तरह के मामलों में त्वरित कार्रवाई होना बेहद आवश्यक होता है ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए और अन्य पुलिसकर्मी इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को अंजाम देने से बचें। आने वाले दिनों में इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़े प्रशासनिक फेरबदल और सख्त सजा का ऐलान किया जा सकता है, जिससे यह तय हो सके कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।