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वाराणसी में बुनकरों के लिए आधुनिक लूम और तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक नए तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की गई है।

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Kantap News डेस्क
10 अग 2026, 00:00
वाराणसी में बुनकरों के लिए आधुनिक लूम और तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना

वाराणसी के ऐतिहासिक लंका क्षेत्र में आज बुनकरों के उत्थान के लिए एक अत्याधुनिक लूम और तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार के हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग द्वारा शुरू किए गए इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य स्थानीय बुनकरों को आधुनिक तकनीक से लैस करना और उनकी कला को वैश्विक बाजार तक पहुँचाना है। उद्घाटन समारोह में राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ बुनकर समाज के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस नए केंद्र में पारंपरिक बनारसी साड़ी बुनाई के साथ-साथ कंप्यूटर-एडेड डिजाइनिंग (CAD) का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे युवा पीढ़ी इस पुश्तैनी हुनर से जुड़कर नई ऊंचाइयां छू सके।

आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कला का अनूठा संगम

केंद्र के उद्घाटन अवसर पर बोलते हुए जिला उद्योग केंद्र के संयुक्त निदेशक ने बताया कि इस पहल से वाराणसी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग पांच हजार से अधिक बुनकर सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। वर्तमान में बाजार की बदलती मांगों को देखते हुए पारंपरिक करघों को आधुनिक मशीनों में अपग्रेड करना बेहद जरूरी हो गया था। इस केंद्र में बुनकरों को बिजली चालित आधुनिक पावर लूम के सुरक्षित संचालन और बेहतरीन गुणवत्ता वाले धागों के रखरखाव के बारे में भी सिखाया जाएगा। इसके अलावा, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के उपयोग पर भी कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, ताकि बुनकर बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे ग्राहकों तक अपनी साड़ियां और अन्य उत्पाद बेच सकें।

युवाओं में दिखा भारी उत्साह और प्रशिक्षण सत्रों की शुरुआत

इस प्रशिक्षण केंद्र के शुरू होने से स्थानीय युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पहले ही दिन सौ से अधिक युवाओं ने विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए अपना पंजीकरण कराया है। केंद्र में अनुभवी डिजाइनरों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक विशेष टीम तैनात की गई है, जो छात्रों और कारीगरों को आधुनिक फैशन के ट्रेंड के अनुसार डिजाइन तैयार करने का प्रशिक्षण देगी। स्थानीय कारीगरों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि हमारी सदियों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर भी सुरक्षित और समृद्ध बनी रहेगी। आगामी महीनों में इस प्रकार के दो और केंद्रों को जिले के ग्रामीण इलाकों में खोले जाने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है।

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