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राजनीति

आईएमए के आरोप: हरियाणा सरकार का आयुष्मान भारत भुगतान विवाद पर कड़ा पलटवार, दबाव बनाने की कोशिश करार

हरियाणा सरकार ने भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) द्वारा आयुष्मान भारत योजना के बकाया भुगतान को लेकर लगाए गए आरोपों का कड़ा जवाब दिया है। प्रशासन का कहना है कि ये आरोप सरकार पर अनुचित दबाव बनाने के इरादे से लगाए जा रहे हैं।

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Ankit Yadav
05 सित 2026, 12:53
आईएमए के आरोप: हरियाणा सरकार का आयुष्मान भारत भुगतान विवाद पर कड़ा पलटवार, दबाव बनाने की कोशिश करार
हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं और आयुष्मान भारत योजना के तहत किए जाने वाले भुगतानों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में भारतीय चिकित्सा संघ ने योजना के अंतर्गत अस्पतालों के रुके हुए भुगतानों को लेकर प्रशासन के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और कई प्रकार के वित्तीय सवाल उठाए थे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब राज्य सरकार ने खुलकर अपना पक्ष रखा है और आईएमए के इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रशासनिक हलकों से आ रही प्रतिक्रियाओं के अनुसार, इन आरोपों में कोई ठोस सच्चाई नहीं है और इन्हें केवल सरकार की छवि धूमिल करने और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करने के हथकंडे के रूप में देखा जा रहा है।

भुगतान प्रक्रिया पर विवाद

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादों से आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी योजना के सुचारू संचालन के लिए यह बेहद जरूरी है कि अस्पताल संचालकों और सरकार के बीच संवाद बना रहे। भारतीय चिकित्सा संघ का कहना था कि समय पर फंड जारी न होने की वजह से कई अस्पतालों को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे मरीजों का इलाज भी प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि कागजी कार्रवाई और तय नियमों के तहत ही सभी भुगतानों को निष्पादित किया जा रहा है। सरकार का यह भी आरोप है कि कुछ संगठन अपने निजी हितों को साधने के लिए इस प्रकार के मामलों को तूल दे रहे हैं और अनावश्यक रूप से सरकार पर हावी होने का प्रयास कर रहे हैं। भविष्य की रणनीतियों और दोनों पक्षों के रुख को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे सभी पंजीकृत चिकित्सा संस्थानों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी को दूर किया जा सके। इसके बावजूद, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष मिलकर कोई ऐसा समाधान निकाल पाते हैं जिससे न केवल अस्पतालों का बकाया भुगतान सुगमता से हो सके, बल्कि मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाएं भी किसी भी प्रकार की बाधा से पूरी तरह सुरक्षित रहें। राज्य का स्वास्थ्य प्रशासन इस मामले में पूरी पारदर्शिता बरतने का दावा कर रहा है ताकि जनता के बीच किसी तरह की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
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