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राजनीति

कानूनी शिकंजा: मल्लिकार्जुन खड़गे 'शुद्धिकरण' मामले में उत्तराखंड के भाजपा नेताओं पर बेंगलुरु में जीरो एफआईआर दर्ज

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े 'शुद्धिकरण' के एक विवादित मामले में उत्तराखंड के भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के खिलाफ कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में जीरो एफआईआर दर्ज की गई है।

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Ankit Yadav
05 सित 2026, 12:22
कानूनी शिकंजा: मल्लिकार्जुन खड़गे 'शुद्धिकरण' मामले में उत्तराखंड के भाजपा नेताओं पर बेंगलुरु में जीरो एफआईआर दर्ज
देश की राजनीति में उस वक्त एक नया बवंडर खड़ा हो गया जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हालिया विवादित 'शुद्धिकरण' प्रकरण को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई। इस सिलसिले में दक्षिण भारत के प्रमुख महानगर बेंगलुरु में उत्तराखंड के कुछ भाजपा नेताओं के खिलाफ औपचारिक तौर पर जीरो एफआईआर दर्ज कराई गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब दोनों पक्षों के बीच लगातार बयानबाजी और राजनीतिक तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका था। इस मामले के सामने आने के बाद से ही विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह कानूनी लड़ाई और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।

बेंगलुरु पुलिस की कार्रवाई

बेंगलुरु पुलिस के अधिकारियों ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि संबंधित धाराओं के तहत जीरो एफआईआर दर्ज कर ली गई है। चूँकि यह घटनाक्रम अलग-अलग राज्यों से जुड़ा हुआ है, इसलिए आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत इस मामले को उचित अधिकार क्षेत्र वाले थाने या संबंधित राज्य की पुलिस को ट्रांसफर किया जा सकता है। कांग्रेस पार्टी और उनके समर्थकों का आरोप है कि इस प्रकार के कृत्य राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ हैं और इससे सामाजिक सौहार्द को भी ठेס पहुंचती है। दूसरी ओर, उत्तराखंड के भाजपा नेताओं की तरफ से इस पूरी कानूनी कार्रवाई और आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रकरण आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। देश के विभिन्न हिस्सों में विपक्षी दल इस प्रकार की घटनाओं को लेकर लगातार सत्तारूढ़ दल को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। इस जीरो एफआईआर के दर्ज होने से न केवल कानूनी पेंच फंसे हैं बल्कि दोनों दलों के बीच का वैचारिक संघर्ष भी और अधिक गहरा गया है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि उत्तराखंड की पुलिस इस मामले में बेंगलुरु से मिलने वाले दस्तावेजों के आधार पर क्या कदम उठाती है और अदालत का रुख क्या रहता है। इस पूरे घटनाक्रम के चलते दोनों राज्यों की पुलिस और प्रशासनिक तंत्र भी सतर्क हो गया है। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक इस मुद्दे पर आमने-सामने आ चुके हैं। जहाँ एक तरफ कांग्रेस नेता इसे अपने शीर्ष नेतृत्व के अपमान के रूप में देख रहे हैं और न्याय की गुहार लगा रहे हैं, वहीं भाजपा के स्थानीय नेता इस मामले में अपनी सफाई पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले हफ्तों में इस मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही कई नए राजनीतिक खुलासे होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
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