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कैग रिपोर्ट का खुलासा: हिमाचल प्रदेश में मनरेगा के धन से बने 180 पंचवटी पार्क, 15.75 करोड़ रुपये खर्च
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक हालिया रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश से जुड़ा बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में मनरेगा के धन का उपयोग करके कुल 180 पंचवटी पार्क तैयार किए गए हैं, जिन पर लगभग 15.75 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई है।
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Ankit Yadav
05 सित 2026, 13:59
देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग द्वारा तैयार की गई एक आधिकारिक रिपोर्ट में पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर कई अहम जानकारियां उजागर की गई हैं। इस रिपोर्ट में ग्रामीण विकास के लिए मिलने वाले महत्वपूर्ण फंड के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के विभिन्न हिस्सों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत मिलने वाली धनराशि का इस्तेमाल करके कुल 180 पंचवटी पार्कों का निर्माण किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन सभी पार्कों को बनाने में कुल मिलाकर लगभग 15.75 करोड़ रुपये की भारी रकम खर्च की गई है।
मनरेगा फंड के उपयोग पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस बात को लेकर प्रशासनिक गलियारों में तीखी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या रोजगार सृजन और ग्रामीण श्रम कल्याण के लिए आरक्षित मनरेगा के पैसे को इस तरह के निर्माण कार्यों में लगाना नियमों के अनुकूल था। जानकारों का मानना है कि मनरेगा जैसी योजनाओं का मूल उद्देश्य ग्रामीण इलाकों के गरीब मजदूरों को साल में कम से कम सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराना होता है, ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित हो सके। हालांकि, जब इस प्रकार के फंड को पार्कों के निर्माण जैसे सौंदर्यीकरण के कार्यों में डायवर्ट किया जाता है, तो योजना के मूल उद्देश्यों और प्राथमिकताओं पर सवालिया निशान लगना स्वाभाविक हो जाता है।
कैग की इस रिपोर्ट के आने के बाद से राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकते हैं और यह जानने की कोशिश कर सकते हैं कि क्या इन पार्कों के निर्माण में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या नियमों की अनदेखी तो नहीं की गई है। दूसरी ओर, संबंधित विभागों और अधिकारियों के स्तर पर इस पूरी रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है ताकि इस बात का स्पष्टीकरण दिया जा सके कि मनरेगा के नियमों के भीतर रहते हुए इन पार्कों का निर्माण किस प्रकार वैध ठहराया जा सकता है।
आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित प्रभाव
आगामी दिनों में इस रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखे जाने तथा इस पर विस्तृत चर्चा होने की पूरी उम्मीद है। जनप्रतिनिधि और विपक्षी नेता इस मामले में सरकार से कड़े सवाल पूछने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय इस मामले में राज्य से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण मांग सकता है। कैग की यह रिपोर्ट न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक बड़ा सबक साबित हो सकती है, जहां ग्रामीण विकास योजनाओं के फंड के सही और पारदर्शी इस्तेमाल को लेकर अक्सर बहस होती रहती है।