Lucknow Desk : सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद को गिराने की कार्रवाई में संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले की लड़ाई अब सड़क पर नहीं, बल्कि अदालत में लड़ी जाएगी। इमरान मसूद ने दावा किया कि मस्जिद की जमीन के राजस्व अभिलेखों में याकूब और वहीद खान के नाम दर्ज हैं। इसके बावजूद संबंधित दस्तावेजों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट के निर्माण से पहले से ही यह मस्जिद वहां मौजूद थी।
उनका आरोप है कि ध्वस्तीकरण से पहले मस्जिद से जुड़े लोगों को कोई नोटिस नहीं दिया गया। सांसद ने कहा कि किसी भी धर्मस्थल को गिराए जाने से किसी को खुशी नहीं होती। उन्होंने मस्जिद के बिजली कनेक्शन से जुड़े बिल का भी जिक्र किया और कहा कि बिजली का बिल विभाग की वेबसाइट से निकाला गया है। उनके मुताबिक, इस मामले में कई दस्तावेज अदालत के सामने रखे जाएंगे। इमरान मसूद ने सवाल उठाया कि जब 24 अगस्त को स्टे खारिज हुआ था, तो प्रशासन ने अपील का अवसर दिए बिना इतनी जल्दी कार्रवाई क्यों की। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस तरह की कार्रवाई से बचना चाहिए था और संबंधित पक्ष को कानूनी विकल्प का मौका मिलना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि अब यह लड़ाई लाठी-डंडे की नहीं, बल्कि कलम और कानून की है। उनके मुताबिक, मामले में हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने बताया कि उनके लोगों की ओर से हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। सांसद ने जनता से शांति, भाईचारा और संयम बनाए रखने की अपील भी की। साथ ही उन्होंने मस्जिद के ध्वस्तीकरण को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार रोजगार और बुनियादी समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दों को आगे बढ़ा रही है। इमरान मसूद ने कहा कि मस्जिद के पुनर्निर्माण और उचित मुआवजे की मांग को लेकर अदालत में मजबूत दस्तावेजों के साथ पक्ष रखा जाएगा।