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राजनीति

अनोखा राजनीतिक गठबंधन: छह साल पहले कांग्रेस और बीजेपी ने मिलकर लड़ा था चुनाव

भारतीय राजनीति में दो धुर विरोधी दलों का एक साथ आना हमेशा से चर्चा का विषय रहता है। क्या आपने कभी कल्पना की है कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) कभी किसी चुनाव में एक साथ मैदान में उतरी होंगी? यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन छह साल पहले ऐसा वास्तव में हुआ था जब दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों ने हाथ मिलाकर चुनावी मुकाबला लड़ा था।

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Ankit Yadav
26 अग 2026, 17:42
अनोखा राजनीतिक गठबंधन: छह साल पहले कांग्रेस और बीजेपी ने मिलकर लड़ा था चुनाव
भारतीय राजनीति की मुख्यधारा में कांग्रेस और बीजेपी को एक-दूसरे का सबसे बड़ा वैचारिक और चुनावी प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। देश के लगभग हर कोने में ये दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकते नजर आते हैं। ऐसे में जब कभी इनके बीच किसी समझौते या गठबंधन की बात सामने आती है, तो सियासी गलियारों में भूचाल आना स्वाभाविक है। हाल ही में सामने आई पुरानी यादों और चुनावी इतिहास ने एक बार फिर से इस दिलचस्प घटना को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है, जिस पर आज भी कई लोग यकीन नहीं कर पाते हैं।

असंभव सा दिखने वाला राजनीतिक मेल

भारतीय चुनावी इतिहास में कई बार ऐसे मोड़ आए हैं जो सामान्य बुद्धि और पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह झुठला देते हैं। ठीक ऐसा ही एक वाकया आज से छह साल पहले देखने को मिला था। जब देश के दो सबसे बड़े और परस्पर विरोधी दल किसी स्थानीय या विशिष्ट राजनीतिक परिस्थिति के चलते एक ही पाले में खड़े हो गए थे। इस अनोखे गठबंधन के तहत दोनों दलों ने अपने पुराने और गहरे मतभेदों को ताक पर रखकर एक साझा चुनावी रणनीति के तहत मैदान में उतरने का फैसला किया था, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया था। इस अप्रत्याशित राजनीतिक सहयोग के पीछे स्थानीय निकाय की खास परिस्थितियां और क्षेत्रीय समीकरण जिम्मेदार थे। अक्सर जमीनी स्तर पर चुनावों की नब्ज राष्ट्रीय मुद्दों से बिल्कुल अलग होती है, जहां स्थानीय आवश्यकताएं और जातीय या सामाजिक समीकरण बड़े वैचारिक दलों को भी मजबूर कर देते हैं कि वे अपने पारंपरिक विरोध को कुछ समय के लिए किनारे रख दें। छह साल पहले हुए इस चुनाव में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था, जहां दोनों दलों के स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मिलकर प्रचार किया था और एक साझा मंच साझा किया था। इस तरह के राजनीतिक प्रयोग भले ही आम तौर पर देखने को न मिलते हों, लेकिन ये लोकतंत्र की विविधता और जटिलता को बखूबी दर्शाते हैं। हालांकि इस गठबंधन की अवधि और इसका असर सीमित क्षेत्र तक ही प्रभावी रहा था, फिर भी यह भारतीय चुनावी इतिहास के पन्नों में एक अनोखी घटना के रूप में दर्ज हो चुका है। आज जब भी देश में ध्रुवीकरण और तीखी बयानबाजी की राजनीति होती है, तो छह साल पहले की इस घटना का जिक्र सियासत के जानकारों के बीच एक दिलचस्प मिसाल के तौर पर जरूर किया जाता है।
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