जेल में अखिलेश यादव और आजम खान की गुप्त बैठक
उत्तर प्रदेश के भीतर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा लगातार ऊपर चढ़ रहा है। इसी सिलसिले में समाजवादी पार्टी के मुख्य नेता अखिलेश यादव ने रामपुर की जेल का रुख किया। वहां उन्होंने सलाखों के पीछे बंद संगठन के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। यह गुप्त बातचीत लगभग 45 मिनट तक चली। इस दौरान दोनों नेताओं ने आगामी चुनावी महासमर की रणनीति पर गंभीर चर्चा की। इसके अलावा मुस्लिम मतों को एकजुट बनाए रखने के उपायों और संगठन की तैयारियों पर भी गहराई से मंथन किया गया। मुलाकात के बाद जेल के बाहर आकर अखिलेश यादव ने मीडिया से बात की। उन्होंने बताया कि आजम खान ने पार्टी संगठन और चुनाव को लेकर कई बहुमूल्य सलाह दी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी का एकमात्र मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी को पराजित करना है। इस पूरी राजनीतिक राह में आजम खान का अमूल्य मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि अखिलेश यादव अपनी इस यात्रा के दौरान एक विशेष दस्तावेज साथ लेकर गए थे। उस कागज में पश्चिमी हिस्से की खास सीटों के विवरण, मतदाता सूचियों से जुड़ी आपत्तियों और संभावित उम्मीदवारों के आंकड़े दर्ज थे।
कांग्रेस पार्टी द्वारा सौंपी गई सीटों की रूपरेखा
दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन के तहत राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी कांग्रेस पार्टी ने बड़ा कदम उठाया है। कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को एक शुरुआती खाका सौंपा है जिसमें सीटों का पूरा विवरण मौजूद है। कांग्रेस की तरफ से यह फेहरिस्त अपने कार्यकर्ताओं से मिले जमीनी फीडबैक के आधार पर तैयार की गई है। अखिलेश यादव को सौंपी गई इस सूची को कुल चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी ए है जिसमें वे स्थान शामिल हैं जहां कांग्रेस का संगठनात्मक आधार बेहद मजबूत है और पार्टी वहां किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहती है। दूसरी श्रेणी बी के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में थोड़ा बहुत फेरबदल करना संभव है और कांग्रेस उन पर बातचीत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके अलावा तीसरी तथा चौथी श्रेणियां सी और डी के रूप में निर्धारित की गई हैं। इन आखिरी दो श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले सभी निर्वाचन क्षेत्रों पर विचार विमर्श और अंतिम निर्णय का द्वार पूरी तरह खुला हुआ है। इसका मतलब यह है कि कांग्रेस इन पर अखिलेश यादव के साथ समझौते के लिए तैयार है। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का यह भी कहना है कि पार्टी किसी भी तरह के जिद्दी आंकड़े या सीटों की निश्चित संख्या पर अड़ी नहीं रहना चाहती है।
गठबंधन की प्राथमिकता और भविष्य की राजनीतिक दिशा
कांग्रेस पार्टी की सबसे पहली प्राथमिकता एक सम्मानजनक संख्या हासिल करना है ताकि पूरा गठबंधन आगामी चुनाव में मजबूती के साथ ताल ठोक सके। हालांकि दोनों दलों के बीच अभी कई दौर की आधिकारिक बातचीत होना बाकी है। इसी वजह से किसी भी अंतिम और ठोस आंकड़े को लेकर अभी से कुछ भी पक्के तौर पर कह पाना संभव नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक जमीन पर अपनी स्थिति सुधारने के लिए दोनों दल लगातार रणनीति तैयार कर रहे हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह शुरुआती गतिविधियां बहुत बड़े बदलाव का संकेत दे रही हैं। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के आधार पर सीटों के बंटवारे का काम चल रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच आपसी तालमेल बिठाने की यह कवायद आने वाले दिनों में और तेज होने की उम्मीद है। दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेता मिलकर भारतीय जनता पार्टी को टक्कर देने की जुगत में लगे हुए हैं। हालांकि सीटों के फाइनल आंकड़े पर मुहर लगना अभी बाकी है लेकिन शुरुआती बैठकों ने सियासी सरगर्मी को काफी बढ़ा दिया है। आजम खान के अनुभव और मार्गदर्शन को समाजवादी पार्टी अपने लिए बहुत बड़ी ताकत मान रही है। अखिलेश यादव की जेल यात्रा और कांग्रेस की तरफ से मिला सीटों का खाका दोनों ही इस बात की गवाही दे रहे हैं कि आगामी चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है।