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राजनीति

गिरिडीह उपचुनाव टला: फरवरी 2027 में उत्तर प्रदेश चुनावों के साथ हो सकती है वोटिंग

झारखंड की गिरिडीह विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से खाली हुई इस सीट पर इस वर्ष मतदान होने की संभावना काफी कम है। चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह चुनावी प्रक्रिया अगले साल फरवरी के दौरान पूरी की जा सकती है।

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Ankit Yadav
23 अक्ट 2026, 13:14
गिरिडीह उपचुनाव टला: फरवरी 2027 में उत्तर प्रदेश चुनावों के साथ हो सकती है वोटिंग

खाली सीट पर चुनाव में देरी की वजह

झारखंड राज्य के भीतर आने वाली गिरिडीह विधानसभा सीट लंबे समय से खाली चल रही है और यहां नए विधायक को चुनने के लिए उपचुनाव होना तय है। इस सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद यह रिक्तता पैदा हुई है। प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट है कि चालू वर्ष के समाप्त होने से पहले इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदान कराना संभव नहीं हो पाएगा। निर्वाचन आयोग के अंतर्गत काम करने वाले सूत्रों ने इस बात के संकेत दिए हैं कि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अगले साल के शुरुआती महीनों का इंतजार करना पड़ सकता है। आधिकारिक तौर पर अभी तक इस विषय में कोई अधिसूचना या घोषणा जारी नहीं की गई है, जिसके कारण अंतिम तारीखों को लेकर असमंजस की स्थिति बरकरार है। क्षेत्र के तमाम नागरिकों और राजनीतिक दलों के बीच इस बात की चर्चा लगातार जारी है कि चुनाव आयोग किस दिन आधिकारिक तारीखों का ऐलान करेगा। मतदाता सूची को दुरुस्त करने के अलावा अन्य तकनीकी तैयारियां भी इस देरी का एक मुख्य कारण मानी जा रही हैं। स्थानीय स्तर पर हर कोई निर्वाचन आयोग की अगली आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है ताकि तस्वीर पूरी तरह साफ हो सके।

मतदाता सूची और ईवीएम की तकनीकी तैयारी

निर्वाचन से जुड़े अधिकारी इस समय मतदाता सूची को अद्यतन करने के बेहद महत्वपूर्ण और सघन कार्य में पूरी तरह से जुटे हुए हैं। मौजूदा समय में झारखंड राज्यभर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया तेजी के साथ आगे बढ़ाई जा रही है। तय किए गए प्रशासनिक समय के अनुसार आगामी 30 नवंबर को संशोधित एवं अंतिम मतदाता सूची को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित कर दिया जाएगा। इस विशेष अभियान के दौरान नागरिकों के नए नाम शामिल करने का काम किया जा रहा है और इसके साथ ही प्राप्त होने वाली सभी आपत्तियों का निपटारा भी किया जा रहा है। मतदाता सूचियों को पूरी तरह से त्रुटिहीन बनाने और अंतिम रूप देने की यह पूरी प्रक्रिया उपचुनाव के लिए एक अनिवार्य और अहम चरण है। इस पुनरीक्षण का काम मुकम्मल होने के बाद ही चुनाव से जुड़ी बाकी सभी प्रशासनिक तैयारियों को गति मिल सकेगी। इसके अलावा आगामी दिसंबर के महीने में मतदान के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की पहली स्तर की तकनीकी जांच का समय निर्धारित किया गया है। इस प्रक्रिया को अंग्रेजी में फर्स्ट लेवल चेकिंग कहा जाता है जिसमें मशीनों की कार्यप्रणाली की तकनीकी रूप से बारीकी से जांच की जाती है ताकि मतदान के रोज कोई तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो।

उत्तर प्रदेश के साथ संभावित तारीख और भविष्य की राह

निर्वाचन आयोग के सूत्रों से मिली गोपनीय जानकारी के अनुसार गिरिडीह विधानसभा सीट पर उपचुनाव को उत्तर प्रदेश के चुनावों के साथ जोड़ा जा सकता है। उत्तर प्रदेश राज्य में विधानसभा चुनाव संपन्न कराने के लिए फरवरी और मार्च 2027 की समय-सीमा निर्धारित की गई है। आयोग के सूत्र यह बताते हैं कि ठीक इसी समय-अवधि के आसपास गिरिडीह सीट पर भी उपचुनाव का आयोजन कराया जा सकता है। हालांकि यह तमाम बातें अभी संभावित कार्यक्रम के दायरे में ही आती हैं और आयोग की तरफ से इसकी कोई पक्की पुष्टि नहीं की गई है। चुनाव की तारीखों का ऐलान करना पूरी तरह से निर्वाचन आयोग का संवैधानिक अधिकार है और अंतिम फैसला भी उसी का होगा। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख नजदीक आने के साथ ही सभी राजनीतिक दलों की निगाहें आयोग के अगले कदमों पर टिक गई हैं। जब तक आयोग की ओर से कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगती तब तक लोगों को फरवरी 2027 के संभावित समय का ही इंतजार करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद ही गिरिडीह के मतदाताओं को नया विधायक चुनने का अवसर प्राप्त हो सकेगा।

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