नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया
छत्तीसगढ़ की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में एक बड़ा बयान देते हुए घोषणा की कि देश के इस हिस्से से अब उग्रवाद का पूरी तरह खात्मा हो चुका है। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के मिले-जुले प्रयासों का ही यह परिणाम है कि जिस भूभाग पर पहले हर समय भय का वातावरण बना रहता था, वहां अब प्रगति का नया सूर्योदय हो चुका है। इस बदलाव के बाद तमाम पूर्व माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा के साथ जुड़ चुके हैं। इस दौरान राष्ट्रपति के स्वागत में पूरा आयोजन स्थल छत्तीसगढ़ महतारी की जय के नारों से पूरी तरह गूंज उठा था। सुरक्षा और विकास के मोर्चे पर मिली इन सफलताओं के कारण स्थानीय निवासियों का जीवन अब बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहा है। सरकार की ओर से उठाए गए कदमों ने इस क्षेत्र की तस्वीर को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। अब यहां के लोग भयमुक्त होकर अपने दैनिक जीवन और कृषि कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।
नुआखाई पर्व और परंपराओं का महत्व
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में पारंपरिक कृषि उत्सव नुआखाई के गहरे महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पावन अवसर केवल प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज के भीतर आपसी मेलजोल और एकजुटता को भी अधिक मजबूत बनाता है। उनके अनुसार यह समारोह साधारण सांस्कृतिक कार्यक्रम से कहीं अधिक बढ़कर है, क्योंकि यह हमारी पुरानी रीतियों, आपसी भाईचारे और जीवन मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक अत्यंत सशक्त साधन है। नई फसल के आगमन के इस विशेष क्षण में उन्होंने देश के अन्नदाताओं के श्रम को शत-शत नमन किया। उन्होंने सभी को याद दिलाया कि हमारी थाली तक पहुंचने वाला भोजन केवल भूख शांत करने का माध्यम भर नहीं है, बल्कि यह किसानों के कठिन परिश्रम और हमारी धरती माता की उपजाऊ शक्ति का जीवंत प्रतीक है। हमें अपनी प्राचीन परंपराओं और संस्कृति से जुड़कर रहना चाहिए ताकि हमारी पहचान हमेशा सुरक्षित बनी रहे। इन पारंपरिक पर्वों के माध्यम से समाज में प्रेम और सहयोग की भावना का विस्तार होता है।
युवाओं के लिए विकसित राष्ट्र का लक्ष्य
देश के युवाओं के साथ सीधी बातचीत करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने उन्हें अपने जीवन का एक स्पष्ट ध्येय निर्धारित कर निरंतर आगे बढ़ते रहने का कड़ा आह्वान किया। उन्होंने युवा पीढ़ी को समझाया कि आज के समय में उनके पास विज्ञान, आधुनिक तकनीक, खेलकूद, कला और कृषि जैसे हर एक क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के अनगिनत रास्ते खुले हुए हैं। वर्ष 2047 तक भारत देश को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के हमारे सामूहिक सपने को सच करने में केवल देश के युवा ही सबसे बड़ी और मुख्य भूमिका निभाएंगे। इसलिए प्रत्येक युवा को अपनी व्यक्तिगत सफलताओं को हमेशा समाज और राष्ट्र की प्रगति के साथ जोड़कर देखना चाहिए। अपने संबोधन के अंतिम चरण में उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक को अपनाते हुए हमें अपनी संस्कृति और मूल परंपराओं को भी सहेजकर रखना होगा। उनकी नजर में कोई भी विकास तब तक अधूरा माना जाएगा जब तक उसके भीतर मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक उत्तरदायित्व का सच्चा भाव शामिल न हो। युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व महसूस करते हुए देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहिए।