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राजनीति

जल संरक्षण की अपील: पीएम मोदी ने आधुनिक तकनीक अपनाने और जल उत्सव को जन-आंदोलन बनाने पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जल उत्सव को एक बड़े जन-आंदोलन में बदलने का आह्वान किया है। उन्होंने पानी की हर एक बूंद बचाने के वास्ते आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया है।

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Ankit Yadav
03 सित 2026, 11:32
जल संरक्षण की अपील: पीएम मोदी ने आधुनिक तकनीक अपनाने और जल उत्सव को जन-आंदोलन बनाने पर दिया जोर
देश भर में जल संकट की चुनौतियों से निपटने और प्राकृतिक संसाधनों के समुचित रख-रखाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से गंभीर संदेश दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर गहरा बल दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी का प्रत्येक कतरा बेहद कीमती है। जल संसाधनों के संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न रखते हुए इसे समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी के साथ एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक आम नागरिक इस अभियान से सीधे तौर पर नहीं जुड़ेंगे, तब तक इस दिशा में अपेक्षित और दीर्घकालिक परिणाम हासिल करना चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।

आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान का अनूठा संगम

जल संचयन और प्रबंधन के क्षेत्र में आधुनिक विज्ञान और तकनीकी नवाचारों की भूमिका पर रोशनी डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए आज के दौर की आधुनिक टेक्नोलॉजी को अपनाना अनिवार्य हो गया है। ड्रिप इरिगेशन, वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट और रिसाइक्लिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से न केवल कृषि और उद्योगों में पानी की भारी बर्बादी को रोका जा सकता है, बल्कि भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने देश के विभिन्न पारंपरिक जल स्रोतों, जैसे तालाबों, बावड़ियों और जोहड़ों के संरक्षण को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया। तकनीकी प्रगति और हमारे पारंपरिक ज्ञान के इस अद्भुत समन्वय से ही जल सुरक्षा के लक्ष्य को सुगमता से प्राप्त किया जा सकता है। देश के विभिन्न राज्यों में जल संरक्षण को लेकर पहले से चल रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों, युवाओं, महिलाओं और स्वयंसेवी संगठनों को आगे आकर इस महाअभियान का नेतृत्व करना चाहिए। वर्षा जल संचयन यानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अपने घरों और कार्यालयों में अनिवार्य रूप से लागू करने का संकल्प हर नागरिक को लेना चाहिए। सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जल कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है ताकि आने वाले समय में देश को जल अभाव की स्थिति का सामना न करना पड़े। विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का भी मानना है कि यदि समय रहते पानी के इस्तेमाल को लेकर हमारी आदतें नहीं बदली गईं, तो भविष्य में स्थितियां बेहद विकट हो सकती हैं। प्रधानमंत्री के इस ताजा आह्वान के बाद देश भर के प्रशासनिक निकायों और स्थानीय निकायों द्वारा जल संरक्षण को लेकर नई कार्ययोजनाएं तैयार किए जाने की संभावना है। उम्मीद की जा रही है कि इस दिशा में उठाए जाने वाले कदम देश को जल समृद्ध बनाने की राह में एक मील का पत्थर साबित होंगे और आम जनमानस में पानी के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करेंगे।
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