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राजनीतिक हलचल: दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय के बाहर मनुस्मृति जलाने पर कांग्रेस नेता उदित राज हिरासत में
दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के केंद्रीय कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान मनुस्मृति की प्रतियां जलाने वाले कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता उदित राज को पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया है। इस घटना के बाद राजधानी के राजनीतिक गलियारों में अचानक सरगर्मी तेज हो गई है और विभिन्न दलों की तरफ से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
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Ankit Yadav
02 सित 2026, 13:58
राजधानी नई दिल्ली में उस समय माहौल पूरी तरह से गर्मा गया जब कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता उदित राज ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय के निकट पहुंचकर एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। इस प्रदर्शन के दौरान उन्होंने और उनके समर्थकों ने प्राचीन ग्रंथ मनुस्मृति की प्रतियों को सार्वजनिक रूप से अग्नि के हवाले कर दिया। इस तीखे विरोध प्रदर्शन की भनक लगते ही स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों में हड़कंप मच गया, जिसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों ने मौके पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उदित राज को अपनी हिरासत में ले लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए यह कदम उठाया जाना बेहद जरूरी था।
प्रदर्शन और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस घटना के बाद से ही आरएसएस मुख्यालय के आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों के जवानों को भारी संख्या में तैनात किया गया है ताकि किसी भी अन्य संगठन या समर्थकों द्वारा संभावित विरोध प्रदर्शन को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। कांग्रेस नेता उदित राज द्वारा उठाए गए इस कदम को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वैचारिक विरोध जताने का एक तरीका था, लेकिन सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की गतिविधियों से शहर की शांति व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। पुलिस अब हिरासत में लिए गए नेता से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस प्रदर्शन में उनके साथ और कौन-कौन लोग शामिल थे।
राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां एक ओर विपक्षी दलों और दलित संगठनों के कुछ वर्गाें द्वारा इस प्रकार के वैचारिक विरोध प्रदर्शनों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष और संघ समर्थित संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि इस तरह के कृत्यों का उद्देश्य केवल समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करना और राजनीतिक रोटियां सेकना है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग और तेज होने की पूरी संभावना है, क्योंकि विभिन्न मोर्चों से इस कार्रवाई के विरोध में आवाजें उठनी शुरू हो चुकी हैं।
प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी गई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस तरह के प्रदर्शन के लिए क्या पहले से कोई औपचारिक अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि बिना अनुमति के इस प्रकार का प्रदर्शन किया गया था, तो संबंधित नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल हिरासत के बाद से दिल्ली की राजनीति का पारा काफी ऊपर चढ़ गया है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस पार्टी इस पूरे घटनाक्रम पर आगे क्या आधिकारिक रुख अपनाती है।