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राजनीति

राजनीतिक घमासान: तमिलनाडु में सीएम विजय के सिग्नेचर लुक वाली गणेश प्रतिमाओं पर बवाल

तमिलनाडु में गणेशोत्सव के दौरान एक नए राजनीतिक विवाद ने तूल पकड़ लिया है, जहां मुख्यमंत्री विजय के सिग्नेचर लुक वाली गणेश प्रतिमाओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कड़े सवाल उठाए हैं।

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Ankit Yadav
16 सित 2026, 14:00
राजनीतिक घमासान: तमिलनाडु में सीएम विजय के सिग्नेचर लुक वाली गणेश प्रतिमाओं पर बवाल
दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में इस समय त्योहारों के बीच राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित की जाने वाली भगवान गणेश की मूर्तियों को लेकर एक अनोखा और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, कई पंडालों में ऐसी गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं जिनका स्टाइल और रूप विशेष रूप से मुख्यमंत्री विजय के सिग्नेचर लुक से प्रेरित बताया जा रहा है। इस अनोखे और अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

भारतीय जनता पार्टी का कड़ा विरोध और सवाल

इस पूरे मामले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बेहद तीखा रुख अपनाया है। भाजपा के नेताओं ने सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया के माध्यम से इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि धार्मिक उत्सवों और भगवान की मूर्तियों को इस तरह से किसी राजनेता विशेष के रूप में ढालना धार्मिक भावनाओं और परंपराओं के अनुकूल नहीं है। पार्टी का मानना है कि इस तरह के कृत्यों से राजनीतिक एजेंडे को धार्मिक आयोजनों में घसीटा जा रहा है, जिसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। भाजपा ने राज्य प्रशासन और आयोजकों से इस मामले में स्पष्टीकरण की मांग की है और यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर इस प्रकार की मूर्तियों को बनाने की अनुमति किसने और कैसे दी। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में इस प्रकार के राजनीतिक तड़के लगने से आम जनता और विभिन्न संगठनों के बीच भी बहस छिड़ गई है। जानकारों का मानना है कि त्योहारों के इस सीजन में इस तरह के विवादों से राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो सकता है। जहाँ एक तरफ आयोजकों और समर्थकों का अपना पक्ष हो सकता है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल इसे नियमों का उल्लंघन और जनता का ध्यान भटकाने का एक प्रयास करार दे रहे हैं। इस मुद्दे पर राज्य के अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर भी सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। आगामी दिनों में इस विवाद के और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना है क्योंकि विभिन्न राजनीतिक मोर्चे इस मुद्दे को तूल देने में जुटे हुए हैं। प्रशासन के स्तर पर भी इस बात की सुगबुगाहट है कि कहीं इससे कानून-व्यवस्था या शांति भंग न हो, इसलिए स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि तमिलनाडु की राजनीति में इस तरह के सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक मुद्दों का हमेशा से एक बड़ा स्थान रहा है और यह नया विवाद आने वाले दिनों में सियासी तापमान को और अधिक बढ़ाने का काम करेगा।
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