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राजनीति

राजनीतिक हुंकार: असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में बिहार जैसी राजनीतिक ताकत दिखाने का किया आह्वान

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की है और पड़ोसी राज्य बिहार की तर्ज पर राजनीतिक रूप से मजबूत होने का आह्वान किया है।

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Ankit Yadav
27 अग 2026, 13:56
राजनीतिक हुंकार: असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में बिहार जैसी राजनीतिक ताकत दिखाने का किया आह्वान
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर से अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए एक नया राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने अपने एक हालिया संबोधन के दौरान समुदाय के लोगों को एकजुट होने की सख्त नसीहत दी है। उनका मुख्य जोर इस बात पर था कि यदि अल्पसंख्यक समुदाय अपनी राजनीतिक ताकत को सही दिशा में संगठित नहीं करेगा, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी आवाज को प्रभावी ढंग से नहीं सुना जा सकेगा। ओवैसी ने साफ तौर पर कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के भीतर भी वैसी ही राजनीतिक क्षमता और ताकत प्रदर्शित की जानी चाहिए जैसी हाल के दिनों में बिहार के चुनाव या राजनीतिक परिदृश्य में देखने को मिली है।

बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में ताकत दिखाने की अपील

उन्होंने अपने भाषण के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि विभिन्न राज्यों में बिखरा हुआ वोट बैंक अगर एक मंच पर आ जाए, तो चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदले जा सकते हैं। बिहार का उदाहरण देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि वहां किस तरह से राजनीतिक लामबंदी के जरिए जमीनी स्तर पर असर छोड़ा गया है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश के सबसे बड़े सूबे यानी उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावों को लेकर सभी दल अपनी रणनीतियां तैयार करने में जुटे हैं। ओवैसी की पार्टी लगातार इस प्रयास में है कि वह यूपी के सीमावर्ती और मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करे, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का दायरा बढ़ सके। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असदुद्दीन ओवैसी का यह आह्वान उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में नए समीकरण पैदा कर सकता है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टियां और सत्तारूढ़ दल दोनों ही इस तरह के बयानों पर अपनी पैनी नजर बनाए रखते हैं, क्योंकि इससे वोटों के ध्रुवीकरण की संभावनाओं पर सीधा असर पड़ता है। ओवैसी के इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक बैठकों और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है, और विभिन्न दलों के नेता इस पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का जमीनी स्तर पर राजनीतिक दलों की रणनीतियों पर कितना प्रभाव पड़ता है और समुदाय के लोग इस अपील को किस रूप में स्वीकार करते हैं।
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