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राजनीति

सौतेला व्यवहार: बाढ़ पीड़ितों की सुध लेने वाला कोई नहीं, तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा

बिहार में बाढ़ की स्थिति और पीड़ितों की बदहाली को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आपदा के इस समय में पीड़ितों के साथ सौतेला बर्ताव किया जा रहा है और उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

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Ankit Yadav
14 सित 2026, 12:05
सौतेला व्यवहार: बाढ़ पीड़ितों की सुध लेने वाला कोई नहीं, तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा
बिहार के कई हिस्सों में हर साल बाढ़ और मानसूनी आपदाओं का प्रकोप देखने को मिलता है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी बस्तियों तक पानी भरने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में प्रभावित परिवारों को प्रशासनिक मदद और राहत सामग्री की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन व्यवस्था की सुस्ती अक्सर पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम करती है। इसी व्यवस्थागत नाकामी को उजागर करते हुए प्रमुख विपक्षी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने तीखा हमला बोला है।

तेजस्वी यादव का कड़ा प्रहार

अपने आक्रामक तेवर के लिए पहचाने जाने वाले तेजस्वी यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा प्रशासन बाढ़ से बेहाल हो चुके आम नागरिकों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। उनका आरोप था कि शासन स्तर पर आपदा पीड़ितों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है, जिससे प्रभावित लोगों के मन में भारी रोष व्याप्त है। नेताओं और अधिकारियों द्वारा जमीनी हकीकत से मुंह मोड़ने के कारण राहत एवं बचाव कार्य गति नहीं पकड़ पा रहे हैं, जिसके चलते जनता खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रही है। बिहार की राजनीति में बाढ़ प्रबंधन हमेशा से एक संवेदनशील और बड़ा मुद्दा रहा है। हर बार मानसूनी सीजन के दौरान करोड़ों लोग बेघर होते हैं या बुनियादी सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं। विपक्षी दलों का यह आरोप है कि सरकारें लंबे-चौड़े दावे तो करती हैं, परंतु जमीन पर स्थिति जस की तस बनी रहती है। प्रभावित इलाकों में चिकित्सा सेवाओं का अभाव, शुद्ध पेयजल की कमी और भोजन के लाले पड़ना आम बात हो गई है। ऐसे में राजनेताओं के बयानों और आरोपों के जरिए यह दबाव बनाने की कोशिश की जाती है कि प्रशासन तुरंत हरकत में आए और राहत पैकेज का दायरा बढ़ाया जाए। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी घमासान और अधिक तेज होने के पूरे आसार हैं। विपक्षी दल इस नाकामी को लेकर सड़क से लेकर सदन तक आवाज बुलंद करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार पर यह नैतिक जिम्मेदारी भी आ गई है कि वह जल्द से जल्द राहत शिविरों की स्थिति सुधारे और हर पीड़ित परिवार तक मदद पहुंचाए ताकि जनजीवन को सामान्य बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
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