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भ्रष्टाचार विरोधी मंच से किनारा: अमेरिका ने ग्रेको संगठन की सदस्यता छोड़ी

अमेरिका ने भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन ग्रेको से हटने का निर्णय लिया है। रूस और बेलारूस के बाद ऐसा कदम उठाने वाला यह तीसरा देश बन गया है।

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Ankit Yadav
01 अक्ट 2026, 17:09
भ्रष्टाचार विरोधी मंच से किनारा: अमेरिका ने ग्रेको संगठन की सदस्यता छोड़ी

ग्रेको से अमेरिका ने नाता तोड़ा

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने यूरोप के प्रतिष्ठित भ्रष्टाचार निरोधक निकाय ग्रेको यानी ग्रुप ऑफ स्टेट्स अगेंस्ट करप्शन से औपचारिक रूप से बाहर निकलने का फैसला किया है। इस संबंध में सोमवार को काउंसिल ऑफ यूरोप को विधिवत सूचना भेज दी गई है। वर्ष 2000 से ग्रेको का सदस्य रहा अमेरिका पिछले 26 वर्षों से इस मंच के जरिए वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और सुशासन के मानकों को मजबूत करने की प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदार था। इस संगठन की स्थापना काउंसिल ऑफ यूरोप ने 1999 में की थी ताकि विभिन्न देशों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को प्रभावी बनाया जा सके। अब अमेरिका के इस संगठन से बाहर होने के बाद उसमें देश की भागीदारी पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी। रूस और बेलारूस के बाद अमेरिका इस वैश्विक संस्था से बाहर होने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के नजरिए से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

प्रशासन का तर्क और आधिकारिक रुख

अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि वर्तमान समय में कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अपने मूल अधिकार क्षेत्र से भटक रही हैं या फिर अमेरिकी नीतियों के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही हैं। सरकार का यह भी दावा है कि इनमें से कुछ संगठन अब पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं रह गए हैं। सार्वजनिक घोषणा से पहले ही एक अमेरिकी अधिकारी ने इस फैसले की पुष्टि कर दी थी। दूसरी तरफ काउंसिल ऑफ यूरोप ने अमेरिका के इस कदम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका का अब तक का योगदान सराहनीय रहा है और उसने भ्रष्टाचार से जुड़ी अच्छी प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान में अहम भूमिका निभाई थी। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि भले ही अमेरिका सदस्य न रहे, लेकिन भविष्य में सहयोग की संभावनाएं अभी भी बरकरार हैं। ग्रेको के मूल्यांकन दस्तावेज अब भी काउंसिल ऑफ यूरोप की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, जिनमें अमेरिका में भ्रष्टाचार रोकथाम के मानकों की विस्तार से समीक्षा की गई थी।

वैश्विक संस्थाओं से दूरी की नीति

ग्रेको से अलग होने का यह निर्णय अमेरिकी प्रशासन की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत वह विभिन्न बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से दूरी बना रहा है। इससे पूर्व अमेरिका विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से भी बाहर निकल चुका है। इस साल जनवरी में अमेरिका ने वेनिस आयोग से बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू की थी, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक कानून के मामलों में दुनिया भर को सलाह देता है। हाल ही में चुनाव निगरानी को लेकर भी अमेरिका का रुख बदला है, जिसमें उसने यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन को अपने मध्यावधि चुनावों की निगरानी के लिए आमंत्रित नहीं किया है। ग्रेको का महत्व इसलिए अधिक था क्योंकि यह कानून के शासन और पारदर्शिता की समीक्षा करता है। इन सभी कदमों को अमेरिका के बदलते कूटनीतिक रुख के रूप में देखा जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी सक्रियता लगातार कम होती जा रही है।

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