बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने अपने नीतिगत फैसलों के तहत मूल ब्याज दर को बढ़ाते हुए इसे 1.25 प्रतिशत कर दिया है। यह कदम देश की आर्थिक स्थिति, मुद्रास्फीति के दबाव और वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनाए रखने के व्यापक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। केंद्रीय बैंक के इस ताजा निर्णय के बाद से वैश्विक वित्तीय बाजारों और एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में सुगबुगाहट तेज हो गई है, क्योंकि पिछले कुछ समय से जापान की मौद्रिक नीतियों पर दुनिया भर के निवेशकों और विश्लेषकों की पैनी नजर बनी हुई थी। बैंक की तरफ से यह कदम देश की आर्थिक रिकवरी को समर्थन देने और मूल्य स्थिरता के संतुलन को साधने के लिए उठाया गया है, जिसके प्रभाव आने वाले दिनों में और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएंगे।
इस नीतिगत बदलाव के पीछे लंबे समय से चली आ रही आर्थिक और मौद्रिक परिस्थितियां मुख्य वजह रही हैं। एक समय था जब जापान का केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए अत्यधिक ढीली मौद्रिक नीति और नकारात्मक ब्याज दरों के दौर से गुजर रहा था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने और घरेलू मोर्चे पर वेतन तथा कीमतों में सुधार के संकेत मिलने के बाद से इस नीति की समीक्षा की जाने लगी थी। बैंक ऑफ जापान के नीति निर्माताओं ने अर्थव्यवस्था में आ रहे क्रमिक सुधार को देखते हुए दरों को सामान्य स्तर पर लाने की प्रक्रिया शुरू की है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के वित्तीय असंतुलन से बचा जा सके। जापान की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक चली सुस्ती से उबारने और उसे मजबूत आधार देने के वास्ते केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने चरणबद्ध तरीके से ब्याज दरों में संशोधन करने का यह मार्ग चुना है।
इस ताजा ब्याज दर वृद्धि का असर आने वाले समय में जापान के आम नागरिकों, व्यावसायिक ऋणों, विदेशी मुद्रा बाजारों और वैश्विक शेयर सूचकांकों पर पड़ना तय माना जा रहा है। जब भी कोई प्रमुख केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरों में फेरबदल करता है, तो उसका सीधा असर मुद्रा बाजार में उस देश की करेंसी के मूल्यांकन के साथ-साथ विदेशी निवेशकों के निवेश रुख पर भी पड़ता है। विश्लेषकों का मानना है कि बीओजे के इस कदम से येन की स्थिति में मजबूती आ सकती है, हालांकि घरेलू स्तर पर कर्ज लेने वालों के लिए ऋण की लागत में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। आगे चलकर केंद्रीय बैंक के अधिकारी आर्थिक आंकड़ों पर बेहद बारीकी से नजर बनाए रखेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह मौद्रिक सख्ती अर्थव्यवस्था की गति को किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुंचाए और वित्तीय बाजार सुचारू रूप से कार्य करते रहें।