दक्षिण अफ्रीका की भूमि पर आयोजित एक वैश्विक कार्यक्रम के दौरान भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच तीखी तकरार देखने को मिली, जब पाकिस्तानी स्पीकर ने सिंधु जल संधि के संदर्भ में भ्रामक और असत्य टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर मौजूद भारतीय प्रतिनिधि ने बिना किसी देरी के मोर्चा संभालते हुए पाकिस्तान के तमाम बेबुनियाद आरोपों का तथ्यात्मक और करारा जवाब दिया। भारतीय पक्ष की ओर से दिए गए स्पष्ट और अडिग तर्कों ने पाकिस्तानी वक्ता की बोलती पूरी तरह बंद कर दी और सभा के समक्ष उनके झूठे प्रोपेगेंडा का पर्दाफाश हो गया। यह वाकया अंतरराष्ट्रीय बैठकों में भारत द्वारा अपनी कूटनीतिक स्थिति को पूरी मजबूती से रखने और किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार का तुरंत मुंहतोड़ जवाब देने की नीति का एक और स्पष्ट प्रमाण साबित हुआ है।
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि यानी इंडस वाटर ट्रेटी लंबे समय से द्विपक्षीय कूटनीति का एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। दशकों पुरानी इस जल वितरण संधि के प्रावधानों और तकनीकी पहलुओं पर दोनों पड़ोसी देशों के बीच समय-समय पर मतभेद उभरते रहे हैं, जिनका इस्तेमाल अक्सर वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी के लिए किया जाता है। हालिया वर्षों में भारत ने इस संधि के कामकाज और उसकी समीक्षा को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा है, क्योंकि सीमा पार से लगातार पानी के प्रबंधन और कूटनीतिक मंचों पर इस समझौते का इस्तेमाल अपने निहित स्वार्थों के लिए दुष्प्रचार फैलाने के वास्ते किया जाता रहा है। वैश्विक सम्मेलनों और मंचों पर इस तरह के संवेदनशील जल समझौतों का राजनीतिकरण करने की पाकिस्तानी कोशिशों को नाकाम करने के लिए भारतीय कूटनीतिज्ञ हमेशा से तत्पर रहे हैं ताकि वास्तविक तथ्यों को दुनिया के सामने रखा जा सके।
इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर यह संदेश गया है कि भारत अब किसी भी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय मंच पर अपने पड़ोसी देश द्वारा फैलाए जाने वाले आधारहीन बयानों या झूठ को नजरअंदाज नहीं करेगा। आने वाले समय में ऐसे कूटनीतिक मंचों पर पाकिस्तान की ओर से भारत को घेरने के प्रयासों का इसी प्रकार कड़ाई से प्रतिकार किए जाने की पूरी संभावना है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीतिक समीकरणों पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। भारत की इस मुखर और तथ्यात्मक प्रतिक्रिया ने वैश्विक समुदाय के समक्ष यह साफ कर दिया है कि जल बंटवारे जैसे तकनीकी समझौतों पर भ्रामक प्रचार करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर झूठे दावे का माकूल जवाब दिया जाएगा।