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रणनीतिक झटका: पाकिस्तान को दरकिनार कर भारत के साथ साझेदारी बढ़ा रहे यूरोपीय देश
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव का एक और बड़ा प्रमाण सामने आया है, जहाँ इटली के बाद अब बेल्जियम ने भी संवेदनशील तकनीक के मामलों में पाकिस्तान की माँगों को सिरे से खारिज करते हुए भारत को प्राथमिकता दी है।
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Ankit Yadav
04 सित 2026, 12:46
वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर पाकिस्तान को लगातार बड़े झटके मिल रहे हैं और पश्चिमी देश अब अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में भारत को सबसे ऊपर रख रहे हैं। हालिया घटनाक्रम में बेल्जियम ने भी इटली की राह पर चलते हुए अत्याधुनिक और संवेदनशील तकनीक के हस्तांतरण के मामले में इस्लामाबाद की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। यूरोपीय देशों का यह बदला हुआ रुख इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक बिरादरी में अब नई दिल्ली की विश्वसनीयता और कूटनीतिक कद कितना मजबूत हो चुका है। रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यूरोपीय संघ के देश अब भारत के साथ अपने दीर्घकालिक आर्थिक और तकनीकी संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने पर विशेष जोर दे रहे हैं, जिसके चलते पारंपरिक रूप से पाकिस्तान के साथ रहने वाले देश भी अब अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव कर रहे हैं।
संवेदनशील तकनीक पर बड़ा फैसला
संवेदनशील तकनीकों की सुरक्षा और रक्षा सहयोग को लेकर पश्चिमी देशों के रुख में आया यह बदलाव रातों-रात नहीं हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था, स्थिर राजनीतिक नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय संधियों के प्रति निष्ठा के दम पर दुनिया भर में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी पहचान बनाई है। दूसरी ओर, पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण यूरोपीय देश अब उसके साथ संवेदनशील क्षेत्रों में सहयोग करने से कतराने लगे हैं। इटली के बाद बेल्जियम का यह निर्णय इस बात को पुख्ता करता है कि पश्चिमी देश अब कूटनीतिक और तकनीकी साझेदारी के मामले में भारत जैसे भरोसेमंद लोकतांत्रिक देश को ही सबसे बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
भविष्य की संभावनाओं को देखा जाए तो यूरोपीय देशों के इस रुख से वैश्विक कूटनीति में भारत की स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। रक्षा, उच्च तकनीक, अंतरिक्ष अनुसंधान और विज्ञान के क्षेत्रों में भारत के साथ काम करने के लिए यूरोपीय राजधानियों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। आने वाले समय में यूरोपीय देशों के साथ होने वाले कई बड़े द्विपक्षीय समझौतों में भारत की प्राथमिकताओं को सर्वोपरि रखा जा सकता है। यह स्थिति न केवल भारत के तकनीकी विकास को एक नई गति प्रदान करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की कूटनीतिक रूप से बढ़ती हुई बेरुखी और अलगाव को भी पूरी तरह से उजागर कर देगी। पड़ोसी देश के लिए यह कूटनीतिक विफलता बेहद निराशाजनक साबित हो रही है, क्योंकि पारंपरिक मित्र भी अब राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए भारत के साथ मजबूत रिश्ते बनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।