हांगकांग में मिले पुर्जों पर पेंटागन की सख्त कार्रवाई अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने हाल ही में उस घटना की गहन जांच शुरू कर दी है जिसके तहत विश्व के सबसे उन्नत माने जाने वाले पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान एफ-35 के कुछ अतिसंवेदनशील कलपुर्जे हांगकांग की सीमा तक पहुंच गए। इस मामले के सामने आने के बाद से ही वैश्विक कूटनीति और रक्षा गलियारों में हड़कंप मच गया है क्योंकि इन पुर्जों की आवाजाही पर बेहद कड़े प्रतिबंध होते हैं। पेंटागन के अधिकारियों का मुख्य ध्यान इस बात का पता लगाने पर है कि आखिर किस प्रकार यह सैन्य साजो-सामान निर्धारित सुरक्षा चक्र को भेदने में सफल रहा और इसके पीछे किन लोगों की संलिप्तता हो सकती है। इस संवेदनशील घटना की जानकारी मिलते ही रक्षा अधिकारियों ने तुरंत आंतरिक समीक्षा बैठकें बुलाई हैं और मामले से जुड़े सभी लॉजिस्टिक्स और शिपिंग दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है ताकि इस गंभीर चूक के मूल कारणों तक पहुंचा जा सके।
चीन के हाथों में तकनीक जाने की आशंका से बढ़ी बेचैनी इस घटना के बाद से वाशिंगटन से लेकर तमाम पश्चिमी रक्षा राजधानियों तक रणनीतिक हलकों में भारी बेचैनी देखी जा रही है। एफ-35 विमान अमेरिकी वायु सेना की रीढ़ हैं और इनमें लगी तकनीक अत्यंत गोपनीय तथा उन्नत श्रेणी की है। इस बात की आशंका सबसे अधिक प्रबल हो गई है कि यदि ये पुर्जे अनधिकृत रूप से वहां पहुंचे हैं, तो क्या इनका लाभ उठाकर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी या वहां की कोई अन्य संस्था इस अमूल्य तकनीक की रिवर्स इंजीनियरिंग कर सकती है। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी वर्चस्व की एक लंबी और जटिल लड़ाई चल रही है। ऐसे में किसी भी सामरिक साजो-सामान का इस तरह प्रतिद्वंद्वी देश के प्रशासनिक नियंत्रण वाले क्षेत्र में पहुंच जाना केवल एक साधारण तस्कर रैकेट का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा व्यवस्था में इस प्रकार की सेंध लगना यह दर्शाता है कि वैश्विक व्यापारिक मार्गों और बंदरगाहों के जरिए रक्षा उपकरणों की अवैध ढुलाई रोकने के लिए बनाए गए मौजूदा नियम अभी भी पूरी तरह चाक-चौबंद नहीं हैं।
सख्त नियम और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला की समीक्षा आने वाले दिनों में इस जांच के नतीजे अमेरिकी रक्षा खरीद और विदेशी सैन्य बिक्री नीति पर गहरा असर डाल सकते हैं। पेंटागन और अन्य खुफिया एजेंसियां मिलकर अब यह रूपरेखा तैयार कर रही हैं कि भविष्य में इस तरह की सुरक्षा चूकों को पूरी तरह से कैसे रोका जाए। इसके साथ ही उन सभी निजी और सरकारी ठेकेदारों तथा मध्यस्थ कंपनियों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है जो इन विमानों के रख-रखाव और कलपुर्जों की आपूर्ति के अनुबंध से जुड़े हुए हैं। यदि जांच के दौरान किसी भी देश या कंपनी की दुर्भावनापूर्ण संलिप्तता साबित होती है, तो अमेरिका की तरफ से कड़े आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आधुनिक सैन्य तकनीक की रक्षा करना केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन के हर एक चरण पर कड़ी नजर रखना भी उतना ही अनिवार्य है। दुनिया भर के रक्षा विश्लेषक अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि पेंटागन अपनी इस जांच रिपोर्ट में क्या खुलासे करता है और भविष्य की रणनीतिक सुरक्षा के लिए कौन से नए कड़े नियम लागू किए जाते हैं।