सुबह की बारिश और हवा से नुकसान
सिद्धार्थनगर जिले के ग्रामीण इलाकों में शुक्रवार, 30 अक्टूबर की सुबह अचानक मौसम ने करवट ली और हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चलने लगीं। इस मौसमी बदलाव का सबसे बुरा असर खेतों में लहलहा रही धान की फसल पर पड़ा है। कई जगहों पर पौधे अपनी जड़ें और त तनों का संतुलन खोकर सीधे जमीन पर आ गिरे। शुरुआती अनुमान के आधार पर यह सामने आया है कि जिले भर में करीब 10 प्रतिशत धान की फसल पूरी तरह खेतों में बिछ चुकी है। इस समय खेतों में धान की फसल पूरी तरह तैयार होने की अवस्था में पहुंच चुकी थी। बहुत सारे खेतों में फसल के ऊपर बालियां निकल आई थीं और उनके अंदर दानों का भराव तेजी से हो रहा था। ऐसे नाजुक वक्त में जब पौधे जमीन पर गिर जाते हैं, तो उनकी बालियां सीधे मिट्टी और पानी के संपर्क में आ जाती हैं। इससे पैदा होने वाले धान के दानों की गुणवत्ता पर बहुत बुरा असर पड़ने की पूरी आशंका बन गई है। किसानों द्वारा महीनों की कड़ी मेहनत और लागत से तैयार की गई इस फसल के अचानक इस तरह धराशायी होने से अन्नदाताओं के चेहरों पर गहरी चिंता साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। जिला प्रशासन ने भी 30 अक्टूबर को इस प्रकार की बारिश और हवा की संभावना को लेकर पहले ही अलर्ट जारी कर दिया था।
कटाई और सुखाने में आ रही है परेशानी
खेतों में फसल के गिर जाने और अत्यधिक नमी बने रहने की वजह से किसानों को अब धान की कटाई करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कटे हुए धान को सुखाने की प्रक्रिया भी इस मौसम में बेहद कठिन साबित हो रही है। किसानों का दर्द साफ है क्योंकि उन्होंने अपनी फसल को इस मुकाम तक पहुंचाने में अपनी पूरी पूंजी और जीतोड़ मेहनत झोंक दी थी। कटाई के एकदम मुहाने पर आकर मौसम के इस तरह अचानक बदल जाने से उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में शुक्रवार की सुबह हुई इस बारिश और हवा के झोंकों ने हर तरफ तबाही के निशान छोड़ दिए हैं। हालांकि इस मौसमी बदलाव और बारिश की वजह से तापमान में जरूर कुछ गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आम लोगों को गर्मी के मौसम से खासी राहत मिली है। लेकिन किसानों के लिए यह राहत किसी बड़ी आफत से कम साबित नहीं हो रही है। उनकी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा इस प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि खेतों से पानी जल्द बाहर नहीं निकला और नमी कम नहीं हुई, तो बचाकुचा धान भी सड़ सकता है। कटाई के इस महत्वपूर्ण चरण में इस तरह की बाधा आना खेती किसी के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। किसानों द्वारा इस पूरे संकट के बीच लगातार भगवान से प्रार्थना की जा रही है कि अब मौसम और अधिक न बिगड़े।
आगे के मौसम को लेकर किसानों की चिंता
खेतों में अपनी फसल को गिरा हुआ देखने के बाद से किसानों की आंखें लगातार आसमान की तरफ टिकी हुई हैं और वे मौसम के हर एक बदलाव पर गहरी नजर रखे हुए हैं। किसानों के मन में सबसे बड़ा डर इस बात का सता रहा है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश और तेज हवाओं का यह सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो खेतों में अभी तक बची हुई खड़ी फसल को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस तरह की अनिश्चितता ने ग्रामीण अंचल के किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। वे लगातार अपने खेतों का दौरा कर रहे हैं और यह आकलन करने में जुटे हैं कि कितनी फसल को बचाया जा सकता है। सरकार और स्थानीय प्रशासन की तरफ से अभी तक किसी विशेष मुआवजे की घोषणा नहीं की गई है, जिससे किसानों की बेचैनी और अधिक बढ़ती जा रही है। साल भर की कमाई का गणित इस एक झटके से पूरी तरह बिगड़ चुका है और परिवारों के सामने भरण-पोषण का संकट मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि आने वाले चौबीस घंटों में धूप नहीं निकली और मौसम साफ नहीं हुआ, तो नुकसान का यह आंकड़ा दस प्रतिशत से काफी आगे निकल सकता है। यही कारण है कि सिद्धार्थनगर के हर एक किसान की जुबान पर इस समय बस यही सवाल है कि उनका यह साल कैसे कटेगा।