छतरपुर में रबी सीजन की बोवनी और कृषि वैज्ञानिक के निर्देश
छतरपुर जिले के भीतर वर्तमान समय में रबी सीजन के अंतर्गत आने वाली फसलों की बुवाई का कार्य तेजी से चल रहा है। हर साल की भांति इस बार भी बड़ी तादाद में किसान भाई चना फसल की खेती करने में जुटे हुए हैं। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खेती करेंगे तो उन्हें बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे। छतरपुर नौगांव कृषि विज्ञान केंद्र में अपनी सेवाएं दे रहे कृषि वैज्ञानिक डॉ कमलेश अहिरवार ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि खेत में फसल की बुवाई करते समय सही नियमों का पालन करना बहुत आवश्यक होता है। स्थानीय स्तर पर खेती करने वाले किसानों को यह सलाह दी गई है कि वे पारंपरिक लापरवाही छोड़कर वैज्ञानिक पद्धति से काम लें। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक ने बताया कि जिले में इस फसल का रकबा काफी बड़ा है और हर वर्ष किसान इसकी बड़े पैमाने पर पैदावार लेते हैं। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि प्रत्येक किसान बुवाई के गणित को अच्छी तरह समझ ले ताकि उनकी मेहनत बेकार न जाए और उन्हें फसल से अधिकतम लाभ मिल सके। बुवाई के इस दौर में सही मार्गदर्शन मिलने से किसानों को काफी मदद मिल रही है और वे अपने खेतों में बुवाई के कार्यों को उसी हिसाब से आगे बढ़ा रहे हैं जिससे भविष्य में उनकी फसल स्वस्थ और मजबूत स्थिति में उभरकर सामने आ सके।
बीज की सही मात्रा और सीडड्रिल मशीन से बुवाई का तरीका
खेतीबाड़ी के दौरान बीज की मात्रा और उसे जमीन में डालने का तरीका बहुत बड़ा असर डालता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ कमलेश अहिरवार के अनुसार जो किसान भाई अपने खेतों में चना फसल की खेती करते हैं उन्हें एक एकड़ जमीन के लिए तीस किलो सीड की बोवनी करनी चाहिए। यदि कोई किसान एक बीघा क्षेत्र में खेती कर रहा है तो वह पंद्रह किलो चना बीज की बोवनी आसानी से कर सकता है। इसके साथ ही यह भी विशेष रूप से ध्यान रखना है कि खेत की सतह पर हाथ से दाने छिड़ककर बुवाई बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय हमेशा सीडड्रिल मशीन का ही उपयोग करके चना बुवाई का कार्य पूरा करना चाहिए। सीडड्रिल मशीन की सहायता से एक तय की गई निश्चित दूरी और एक समान निश्चित गहराई पर बीजों की बुवाई बहुत ही आसानी से हो जाती है। जब मशीन के माध्यम से बीज जमीन के अंदर उचित गहराई पर पहुंचते हैं तो उनका अंकुरण बेहतर तरीके से होता है। इसके विपरीत खुले में दाने छिड़कने से कई प्रकार की समस्याएं पैदा हो जाती हैं और सही पैदावार मिलने की संभावना काफी कम हो जाती है। वैज्ञानिक ने जोर देकर कहा है कि आधुनिक मशीनों का प्रयोग करके ही किसान अपनी लागत को नियंत्रित कर सकते हैं और अपनी फसल के उत्पादन को एक नए स्तर पर पहुंचा सकते हैं जो उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित होता है।
उन्नत किस्मों का चयन और स्थानीय किसानों का पारंपरिक अनुभव
उत्पादन में बढ़ोतरी हासिल करने के लिए उन्नत किस्मों का चयन करना एक अनिवार्य कदम माना गया है। कृषि वैज्ञानिक का यह भी कहना है कि यदि किसान भाई नए बीजों का चयन करके बोवनी करेंगे तो उनकी कुल उपज में तीस से पैंतीस प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। ऐसी उन्नत किस्में प्राप्त करने के लिए किसान बीज निगम छतरपुर या फिर राष्ट्रीय बीज निगम निवाड़ी से संपर्क करके चने के उन्नत किस्म के बीज खरीद सकते हैं। दूसरी ओर छतरपुर क्षेत्र के रहने वाले अनुभवी किसान देवीदीन पाल, कमलेश सोनी और वैद्यनाथ पाल का कहना है कि वे सभी लंबे समय से चने की खेती करते आ रहे हैं। उनके बाबा के समय से यह कृषि कार्य उनके परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आ रहा है। उन्होंने अपने पूर्वजों से जो तौर-तरीके सीखे हैं उन्हीं के आधार पर वे आज भी खेती कर रहे हैं। वर्तमान बुवाई के सीजन में वे एक बीघा जमीन के अंदर सीडड्रिल मशीन की मदद से पंद्रह किलो बीज की बोवनी कर रहे हैं। वे लोग आमतौर पर अपने ही खेत में इस साल पैदा हुए चने को साफ करके बीज के रूप में तैयार करते हैं और फिर सीडड्रिल मशीन से उसकी बुवाई कर देते हैं। वे बाहर से नया बीज नहीं खरीद पाते हैं और न ही किसी प्रकार का बीज उपचार करते हैं बल्कि पारंपरिक ढंग से ही अपनी खेती का पूरा चक्र सफलतापूर्वक चलाते आ रहे हैं।