भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में घरेलू बाजार की स्थिति स्पष्ट हाल ही में जारी भारतीय रिजर्व बैंक के मासिक बुलेटिन में देश की वित्तीय सेहत को लेकर बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक तथ्य सामने आए हैं। केंद्रीय बैंक के विश्लेषण के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी गंभीर तनाव और तमाम प्रकार की भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था पूरी तरह से लचीली और मजबूत बनी हुई है। देश के भीतर औद्योगिक उत्पादन, उपभोक्ता मांग और सेवा क्षेत्र के मोर्चे पर लगातार बेहतरीन आंकड़े दर्ज किए जा रहे हैं, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि विदेशी झटकों का हमारी आंतरिक वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव न्यूनतम स्तर पर है। भारतीय अर्थव्यवस्था के इस आंतरिक संबल ने पूरी दुनिया के निवेशकों का भरोसा भारत के प्रति और अधिक मजबूत कर दिया है, जिससे घरेलू शेयर बाजार और वित्तीय संस्थानों में भी काफी सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है।
विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों का मजबूत प्रदर्शन और उसकी पृष्ठभूमि जब कभी वैश्विक पटल पर मध्य पूर्व या अन्य प्रमुख क्षेत्रों में अशांति फैलती है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक व्यापार पर पड़ता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में देश के बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, खुदरा व्यापार और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख सेक्टरों ने असाधारण प्रदर्शन करके अपनी मजबूती का लोहा मनवाया है। पारंपरिक रूप से जब बाहरी मोर्चे पर संकट गहराता है, तो आयातित महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है और घरेलू निवेशकों में घबराहट का माहौल बन सकता है। परंतु इस बार देश की मौद्रिक नीति और राजकोषीय प्रबंधकों की सूझबूझ के चलते बाजार में पर्याप्त तरलता बनी हुई है और बैंकिंग सेक्टर भी किसी भी संभावित झटके को झेलने के लिए पूरी तरह सक्षम स्थिति में खड़ा है। सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रोत्साहनत्मक कदमों और नीतिगत सुधारों ने इन उद्योगों को विपरीत वैश्विक परिस्थितियों में भी निरंतर आगे बढ़ने के लिए एक ठोस वैचारिक एवं व्यावहारिक आधार प्रदान किया है।
आने वाले दिनों में विकास की गति और संभावित आर्थिक प्रभाव आगामी तिमाहियों में देश की आर्थिक चाल किस दिशा में आगे बढ़ेगी, इसको लेकर वित्तीय विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं में काफी आशावादी दृष्टिकोण देखा जा रहा है। यदि पश्चिम एशिया का यह तनाव और अधिक लंबा खींचता है या कच्चे तेल के दामों में और अधिक उतार-चढ़ाव आता है, तो भी भारत के घरेलू बाजार की यह अंतर्निहित मजबूती देश को किसी भी बड़े संकट से सुरक्षित रखने में मददगार साबित होगी। रिजर्व बैंक और अन्य प्रमुख वित्तीय विश्लेषक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि देश को अपनी निर्भरता ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की तरफ तेजी से बढ़ानी चाहिए ताकि बाहरी उथल-पुथल का असर आम आदमी की जेब और देश के राजकोषीय घाटे पर कम से कम पड़े। आने वाले समय में घरेलू मांग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार इस विकास रथ को और अधिक गति प्रदान करेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया के लिए एक विकास का उज्ज्वल प्रकाशस्तंभ बनकर उभरेगी।