नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गिरफ्तारी का विरोध किया, जबकि CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या देश में तिरंगा फहराना भी अपराध हो गया है।
इस घटनाक्रम के बाद चर्चा शुरू हुई है कि क्या कांग्रेस और CJP किसी साझा मुद्दे पर साथ आ सकते हैं। हालांकि, अभी तक दोनों पक्षों के बीच औपचारिक गठबंधन या साझा अभियान का कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है।
राहुल गांधी ने गिरफ्तारी पर क्या कहा?
राहुल गांधी ने सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल भेजे जाने की आलोचना की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक आवाज दबाने की कोशिश बताया और कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को जेल भेजना लोकतंत्र तथा असहमति के अधिकार पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अभिजीत दीपके ने क्या आरोप लगाया?
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच X पर दोनों नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश में तिरंगा फहराना भी अपराध है। दीपके ने केंद्र सरकार पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर सरकार ऐसा करना चाहती है, तो उसे खुलकर आपातकाल घोषित कर देना चाहिए। ये दीपके के आरोप और राजनीतिक बयान हैं। इन्हें पुलिस की कार्रवाई के बताए गए कानूनी आधार से अलग समझना जरूरी है।
क्या कांग्रेस और CJP के बीच गठबंधन हो सकता है?
सिर्फ राहुल गांधी के गिरफ्तारी का विरोध करने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कांग्रेस और CJP औपचारिक गठबंधन करने जा रहे हैं। दोनों पक्षों की ओर से ऐसी किसी साझेदारी की पुष्टि नहीं की गई है।
फिलहाल, दोनों के बयानों में लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर समानता दिखाई देती है। यदि आगे चलकर दोनों पक्ष एक-दूसरे के आंदोलनों का समर्थन करते हैं, तो मुद्दा-आधारित सहयोग की संभावना बन सकती है। लेकिन इसे किसी गठबंधन या बड़े विपक्षी मोर्चे की शुरुआत कहना अभी जल्दबाजी होगी।
क्या बीजेपी की साजिश के आरोप साबित हैं?
अभिजीत दीपके ने गिरफ्तारी को विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया है और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। हालांकि, बीजेपी या केंद्र सरकार की साजिश के आरोप को साबित करने वाला कोई स्वतंत्र प्रमाण इस रिपोर्ट में सामने नहीं है। इसलिए आरोपों और स्थापित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
क्या है पूरा मामला?
सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। उन पर आरोप है कि बैरिकेड लगे होने के बावजूद वे परिसर में दाखिल हुए। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। दोनों ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के हिरासत संबंधी आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
गिरफ्तारी के बाद राहुल गांधी ने उनका समर्थन किया और अभिजीत दीपके ने सरकार पर सवाल उठाए। इससे राजनीतिक बहस तेज हुई है, लेकिन फिलहाल कांग्रेस और CJP के बीच औपचारिक गठबंधन या बीजेपी की साजिश के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।