शाहजहांपुर। छह महीने से अपने बच्चों को लेकर मंदिर के सामने बैठे एक बुजुर्ग पिता ने डीएम से मदद की गुहार लगाई है।
शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में फैक्ट्री स्टेट स्थित रामलीला मैदान के सामने मंदिर के पास पिछले छह महीने से अपने बच्चों को लेकर बैठे एक बुजुर्ग पिता की पीड़ा को कंटाप न्यूज़ की टीम ने प्रमुखता से उठाया। परिवार की बदहाली और बच्चों की परेशानी को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने मामले का संज्ञान लिया। प्रशासन की पहल पर परिवार को रहने के लिए जगह तो उपलब्ध करा दी गई, लेकिन सिर छिपाने के लिए पक्की छत और भोजन की व्यवस्था अब भी परिवार की जरूरत बनी हुई है।
6 महीने से बच्चों को लेकर मंदिर के सामने बैठा परिवार
कंटाप न्यूज़ की टीम ने जब बुजुर्ग रक्षपाल बाबा से बातचीत की, तो उन्होंने अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि वह पिछले छह महीने से अपने बच्चों को लेकर मंदिर के सामने रहने को मजबूर हैं। उनके बच्चों में एक बच्चा न तो ठीक से देख पाता है और न ही बोल पाता है। ऐसे में बच्चों की देखभाल करना और परिवार का गुजारा चलाना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है। उनकी जिंदगी की इस परेशानी के बीच परिवार को मदद और सहारे की जरूरत है।
इस मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने परिवार को रहने के लिए जगह उपलब्ध कराई है। प्रशासन की इस पहल से बुजुर्ग पिता को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन उनकी मुश्किलें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। रहने के लिए जगह मिलने के बावजूद छत, भोजन और बच्चों के पालन-पोषण की व्यवस्था परिवार के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
जिलाधिकारी और प्रशासन का जताया आभार
रक्षपाल बाबा ने जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन ने उन्हें रहने के लिए जगह उपलब्ध कराकर बड़ी मदद की है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जिलाधिकारी साहब ने उनके लिए भगवान जैसा काम किया है।
हालांकि, बाबा का कहना है कि केवल जगह मिल जाने से परिवार का गुजारा संभव नहीं है। जब तक सिर पर छत और भोजन की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक बच्चों का पालन-पोषण करना उनके लिए कठिन बना रहेगा। रक्षपाल बाबा ने कंटाप न्यूज़ के माध्यम से एक बार फिर जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह से मदद की अपील की है। उन्होंने आग्रह किया कि उनके परिवार को रहने के लिए छत की व्यवस्था कराई जाए, नियमित भोजन की सुविधा मिले और राशन कार्ड बनवाया जाए, ताकि उन्हें सरकारी राशन का लाभ मिल सके और बच्चों का भरण-पोषण हो सके।
जगह मिलने से परिवार को एक उम्मीद जरूर मिली है, लेकिन एक बुजुर्ग पिता के सामने अपने बच्चों की परवरिश और उनकी जरूरतें पूरी करने की चुनौती अब भी है। खासकर ऐसे बच्चे की देखभाल, जो न ठीक से देख पाता है और न बोल पाता है, परिवार के लिए अतिरिक्त कठिनाई पैदा करती है।
अब जरूरत है कि संबंधित प्रशासन परिवार की स्थिति का आकलन कर पात्रता के अनुसार आवास, खाद्यान्न और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए, ताकि इस परिवार को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सके।