अदालत ने सरकार से मांगी जवाबदेही
झारखंड हाइकोर्ट के न्यायाधीश दीपक रोशन की पीठ ने वर्ष 2015 की कांस्टेबल भर्ती परीक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई की है। इस कानूनी प्रक्रिया में राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को आधिकारिक रूप से प्रतिवादी बनाया गया है। अदालत ने इन दोनों निकायों से यह सवाल किया है कि शारीरिक, मेडिकल और लिखित परीक्षा जैसे सभी आवश्यक चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले प्रतिभागियों का चयन अब तक क्यों नहीं हुआ। अविनाश कुमार और अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और अपनी नियुक्ति की प्रक्रिया को पूरा करने का अनुरोध किया है। यह पूरा मामला साल 2015 की उस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है जिसमें कुल 7272 पदों पर नियुक्ति की जानी थी। अदालत की इस सख्ती के बाद अब राज्य प्रशासन और चयन आयोग को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर किन कारणों से योग्य अभ्यर्थियों को अब तक नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है और इस पूरी चयन प्रक्रिया में देरी क्यों हुई है।
परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी नियुक्ति का इंतजार
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि संबंधित अभ्यर्थियों ने भर्ती परीक्षा के सभी निर्धारित मानकों और चरणों को पूरी तरह से पास कर लिया है। बावजूद इसके, जेएसएससी की ओर से उनकी नियुक्ति की आधिकारिक सिफारिश सरकार को नहीं भेजी गई है। इसी भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत अभी भी 1518 पद खाली पड़े हैं, जिन्हें भरने की मांग याचिकाकर्ता लगातार कर रहे हैं। अदालत ने सरकार और चयन आयोग से उन सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है जो नियुक्ति प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब उन्होंने चयन के हर पैमाने पर खुद को योग्य सिद्ध कर लिया है, तो फिर प्रशासनिक स्तर पर उन्हें बाहर क्यों रखा जा रहा है।
कानूनी पृष्ठभूमि और सुप्रीम कोर्ट का आदेश
साल 2015 की इस विवादित कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का मामला काफी पुराना है और पहले भी अदालतों में चर्चा का विषय रहा है। पूर्व में इसी परीक्षा से जुड़े एक अन्य प्रकरण में जितेंद्र कुमार शर्मा और उनके साथियों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। उस दौरान शीर्ष अदालत ने 21 अगस्त 2026 को अपने महत्वपूर्ण आदेश में 862 अभ्यर्थियों को नियुक्त करने का निर्देश दिया था। उसी दिशा में अब अन्य शेष रह गए अभ्यर्थियों ने अपनी नियुक्ति की उम्मीद के साथ हाइकोर्ट का रुख किया है। यह भर्ती प्रतियोगिता परीक्षा कुल 7272 पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिनमें से बड़ी संख्या में रिक्तियां अब भी बनी हुई हैं। कानून के जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश का हवाला देकर वर्तमान याचिकाकर्ता भी अपनी दावेदारी को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। अब देखना यह है कि हाइकोर्ट की इस विशेष सुनवाई के बाद सरकार और जेएसएससी क्या कदम उठाते हैं ताकि इन 1518 पदों पर नियुक्ति की बाधा को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके और अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।