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कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आधुनिक ड्रोन तकनीक के लिए 1,200 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को दी मंजूरी

देश के कृषि क्षेत्र को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

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Kantap News डेस्क
10 अग 2026, 00:00
कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आधुनिक ड्रोन तकनीक के लिए 1,200 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को दी मंजूरी

देश भर के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है, जिसके तहत केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के अंतर्गत देश के ग्रामीण इलाकों में कृषि ड्रोन के वितरण और उनके रख-रखाव के लिए विशेष सहायता प्रदान की जाएगी ताकि छोटे और सीमांत किसानों को भी आधुनिक खेती के संसाधन आसानी से मिल सकें। कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरी परियोजना पर सरकार आगामी तीन वर्षों के दौरान लगभग 1,200 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस फंड का मुख्य उद्देश्य किसानों को कीटनाशकों और उर्वरकों के छिड़काव के लिए पारंपरिक तरीकों से दूर ले जाकर वैज्ञानिक और सुरक्षित तकनीक की ओर आकर्षित करना है, जिससे समय की बचत तो होगी ही, साथ ही स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी काफी हद तक कम हो जाएंगे।

ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर ग्रामीण स्तर पर इस योजना के सफल क्रियान्वयन से न केवल खेती-किसानी के तौर-तरीके बदलेंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश भर के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को ड्रोन उड़ाने और उनके तकनीकी रखरखाव का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत पहले चरण में लगभग एक लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिन्हें प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ड्रोन ऑपरेटर का आधिकारिक प्रमाण पत्र भी मिलेगा। इसके अलावा, महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को भी इस योजना में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है ताकि वे अपने क्षेत्रों में ड्रोन किराए पर देने का व्यावसायिक मॉडल अपना सकें और आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकें। इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया संबल मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि कृषि और प्रौद्योगिकी का यह अनूठा संगम देश के अन्नदाताओं की किस्मत बदलने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया और किसानों की उम्मीदें कृषि अर्थशास्त्रियों और जानकारों ने सरकार के इस कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा की है और इसे समय की सबसे बड़ी मांग बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से किया जाता है, तो देश में फसल उत्पादन की लागत में कम से कम पंद्रह से बीस प्रतिशत तक की भारी कमी आ सकती है। किसानों ने भी इस पहल का स्वागत किया है क्योंकि पारंपरिक मजدور संकट और बदलते मौसम के मिजाज के बीच आधुनिक तकनीक ही एकमात्र ऐसा विकल्प नजर आ रही है जो खेती को टिकाऊ और लाभदायक बना सकती है। आने वाले सप्ताह में देश के विभिन्न राज्यों के कृषि विभागों द्वारा इस योजना के जमीनी स्तर पर प्रसार के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे, जहां किसानों को पंजीकरण प्रक्रिया और मिलने वाली सब्सिडी के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

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