यशोभूमि में दसवें संस्करण का शुभारंभ
नई दिल्ली के यशोभूमि में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दसवें संस्करण का भव्य उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देश और दुनिया भर से तकनीकी क्षेत्र के दिग्गज शामिल हुए। उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने एक विशेष संबोधन दिया जिसमें उन्होंने देश की तकनीकी प्रगति का खाका खींचा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारत के सपनों का मंच है जो देश की लगातार बढ़ती हुई प्रगति को पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है। इसी कार्यक्रम के बीच प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि उन्हें सुबह ही एक बहुत ही दुखद समाचार मिला है। मशहूर और दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं। उन्होंने नाना पाटेकर के निधन पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और उनके परिवार तथा सभी चाहने वालों के प्रति दुख प्रकट किया। उन्होंने याद किया कि कैसे वह एक असाधारण कलाकार थे जिन्होंने अपने अभिनय के दौरान विभिन्न प्रकार के किरदारों के जरिए हमेशा दर्शकों के दिलों को जीता था। उनके अनुसार दिवंगत अभिनेता का जीवन देश के तिरंगे की आन बान और शान के लिए पूरी तरह से समर्पित रहा था। वह किसी भी प्रकार के पुराने बंधनों में बंधकर नहीं रहे बल्कि एक स्वतंत्र परिंदे की तरह फिल्मों की दुनिया के खुले आसमान में अपनी कला के बल पर लगातार उड़ान भरते रहे थे।
नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि और तकनीक पर बात
मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से समाज में व्याप्त व्यवस्था पर हमेशा बहुत करारा प्रहार किया था। वह समाज की बुराइयों के विरुद्ध खुलकर काम करने वाले एक सच्चे क्रांतिवीर की तरह थे। उनकी वाणी जितनी अधिक तेज और असरदार हुआ करती थी उनकी खामोशी भी उतनी ही ज्यादा प्रभावी होती थी। वह हमेशा देश के विरोधियों पर निरंतर अंकुश लगाए जाने के प्रबल समर्थक रहे थे। इसके बाद उन्होंने अपने संबोधन का रुख देश में मोबाइल तकनीक और इसकी प्रगति की ओर मोड़ा। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से मोबाइल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत ने बहुत लंबी छलांग लगाई है और अब हम हर मोर्चे पर आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि बीते 10 और 12 वर्षों के दौरान मोबाइल फोन केवल आधुनिक संचार का एक साधारण माध्यम ही नहीं बना है। यह देश में सुशासन का भी एक बेहद अहम टूल बनकर पूरी तरह से सामने आया है जो कि सरकार के डिजिटल इंडिया विज़न के एकदम कोर में हमेशा से रहा है। मोबाइल और इंटरनेट की लगातार बेहतर होती कनेक्टिविटी ने देश के भीतर शिक्षा, स्वास्थ्य और तमाम जरूरी सरकारी सेवाओं को बिना किसी बड़ी बाधा के सुचारू रूप से चालू रखा है। आज के समय में देश के दूरदराज और सुदूर गांवों में रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चे भी बहुत ही आसानी से गुणवत्तापूर्ण ज्ञान तक अपनी पहुंच बना पा रहे हैं।
डिजिटल इंडिया विज़न से बदली देश की स्थिति
देश में डिजिटल इंडिया अभियान के प्रभाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि इससे किस प्रकार से पूरे देश की स्थिति में आमूल-चूल परिवर्तन आया है। एक दशक पहले तक देश के भीतर डिजिटल डिवाइड एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में मौजूद था। उस समय आधुनिक तकनीक धीरे-धीरे एक विशेषाधिकार बनती चली जा रही थी जिसका मतलब यह था कि केवल साधन संपन्न लोग ही इसका लाभ उठा सकते थे। भारत में बिल्कुल वैसी ही स्थिति लगातार बनती जा रही थी लेकिन डिजिटल इंडिया अभियान ने इस स्थिति को पूरी तरह से बदलने की पक्की ठानी। सरकार इस अभियान के पूरे केंद्र में मोबाइल फोन को लेकर आई जो तकनीक के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक प्रयास साबित हुआ। अब डिजिटल लर्निंग हर आम नागरिक की पहुंच के दायरे में बहुत ही सरलता से आ रही है। डिजिटल गवर्नेंस ने देश के पुराने हालात को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है और आज सैकड़ों प्रकार की सरकारी सेवाएं सीधे मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकारी सहायता का पैसा अब बिचौलियों के बिना सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचाया जा रहा है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के जरिए लगभग 50 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि सीधे तौर पर देश के असली लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे जा चुके हैं जिससे व्यवस्था में अभूतपूर्व पारदर्शिता आई है।