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मुजफ्फरपुर में लीची अनुसंधान केंद्र द्वारा किसानों के लिए आधुनिक बागवानी प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के परिसर में आज स्थानीय किसानों के लिए एक विशेष एक दिवसीय बागवानी और उन्नत कृषि तकनीक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।

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Kantap News डेस्क
10 अग 2026, 00:00
मुजफ्फरपुर में लीची अनुसंधान केंद्र द्वारा किसानों के लिए आधुनिक बागवानी प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

मुजफ्फरपुर की विश्वप्रसिद्ध शाही लीची की पैदावार को और बेहतर बनाने तथा किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से आज एक महत्वपूर्ण कृषि प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में जिले के विभिन्न गाँवों से आए सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया। वैज्ञानिकों ने किसानों को पेड़ों की कटाई-छंटाई, कीट नियंत्रण, टपकन सिंचाई प्रणाली और जैविक खादों के सही उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना बेहद जरूरी हो गया है ताकि फसल खराब होने के जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।

जलवायु अनुकूल खेती पर जोर

प्रशिक्षण सत्र के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को यह भी सिखाया कि बेमौसम बारिश या अत्यधिक गर्मी जैसी विपरीत मौसम स्थितियों में लीची के बगीचों की सुरक्षा कैसे की जाए। किसानों को मिट्टी की जांच कराने और उसकी उर्वरता के अनुसार ही उर्वरक डालने की सलाह दी गई। इसके साथ ही, लीची के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और पैकेजिंग पर विशेष सत्र आयोजित किया गया ताकि किसान अपनी फसल को केवल स्थानीय मंडियों तक सीमित न रखकर देश-विदेश के बड़े बाजारों और सुपरमार्केट्स तक पहुँचा सकें। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी और बीमा योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की।

किसानों ने साझा किए अपने अनुभव

शिविर के दौरान कई प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिक विधियों को अपनाने से उनकी पैदावार में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कुछ किसानों को सम्मानित भी किया गया। जिला कृषि अधिकारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य बिहार के किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करना है। इस तरह के प्रशिक्षण शिविर आने वाले हफ्तों में अन्य प्रखंडों में भी आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।

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