टिकटों की ऊंची कीमतें और श्रेणी
भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले दूसरे टी20 मुकाबले के लिए रांची में दर्शकों को काफी अधिक धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। जेएससीए स्टेडियम में खेले जाने वाले इस मैच के लिए सामान्य प्रवेश टिकट की न्यूनतम दर 1600 रुपये निर्धारित की गई है। इसके विपरीत, लखनऊ के इकाना स्टेडियम में इसी सीरीज के पहले मैच का सबसे सस्ता टिकट मात्र 399 रुपये का था, जो रांची की कीमत का एक चौथाई है। वहीं, इंदौर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को आयोजित होने वाले तीसरे मैच के लिए सबसे कम कीमत 1000 रुपये है। रांची में सामान्य टिकटों की श्रेणी 1600 रुपये से शुरू होकर 4500 रुपये तक जाती है। प्रीमियम और लक्जरी सुविधाओं के लिए टिकट की दरें और भी अधिक हैं। उदाहरण के लिए, कॉरपोरेट बॉक्स का मूल्य 8000 रुपये, हॉस्पिटैलिटी बॉक्स का 9000 रुपये और एमएस धोनी पवेलियन का 10000 रुपये तय किया गया है। स्टेडियम में सबसे महंगा टिकट 18000 रुपये का उपलब्ध है, जबकि लखनऊ में यह अधिकतम 13500 रुपये और इंदौर में 12500 रुपये ही है।
कालाबाजारी और ऑनलाइन वितरण पर सवाल
मैच के आधिकारिक टिकटों की बिक्री व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन टिकट वितरण शुरू होने के मात्र 17 मिनट के भीतर ही 4022 टिकटों की बिक्री हो गई, जिसके बाद प्रशंसकों ने उपलब्धता पर असंतोष जताया है। यह पहली बार नहीं है जब रांची में ऑनलाइन टिकटों के वितरण को लेकर शिकायतें सामने आई हैं, क्योंकि पिछले वर्ष दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच के दौरान भी ऐसी ही स्थिति देखी गई थी। इस बीच, बाजार में टिकटों की कालाबाजारी भी सक्रिय हो गई है। पुलिस ने सोमवार को उन व्यक्तियों को पकड़ा है जो 1600 रुपये के आधिकारिक टिकट को स्टेडियम के बाहर 3200 रुपये तक की ऊंची कीमतों पर बेच रहे थे। प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कालाबाजारियों पर नजर रखी है। जेएससीए स्टेडियम की कुल क्षमता 39500 दर्शकों की है और इस आयोजन के लिए लगभग 39000 टिकटों की छपाई कराई गई है, जिससे कुल राजस्व 11 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
कॉम्प्लिमेंट्री पास और कानूनी निगरानी
टिकट वितरण के साथ-साथ मुफ्त मिलने वाले कॉम्प्लिमेंट्री पास का मुद्दा भी विवादों के केंद्र में रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुल छपे हुए टिकटों में से करीब 10 प्रतिशत हिस्सा कॉम्प्लिमेंट्री पास के रूप में वितरित किए जाने का दावा किया गया है। इस विषय पर मामला न्यायालय तक पहुंच गया है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कॉम्प्लिमेंट्री टिकटों के वितरण पर कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया है। आधिकारिक आदेश के तहत, प्रशासन, मीडियाकर्मियों और मैच के संचालन से जुड़े व्यक्तियों को दिए जाने वाले सभी मुफ्त पासों का सटीक रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया है। पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है ताकि टिकटों की मनमानी न हो सके। प्रशंसकों के बीच कीमतों में इतना बड़ा अंतर एक प्रमुख चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि रांची के दर्शक लखनऊ के मुकाबले काफी अधिक खर्च करने को मजबूर हैं। टिकटों की पूर्ण बिक्री के बाद ही इस आयोजन से होने वाली वास्तविक कमाई का अंतिम आंकड़ा प्रशासन द्वारा सार्वजनिक किया जाएगा।