रेलवे का नया सुरक्षा आदेश
भारतीय रेलवे ने 29 अक्टूबर 2026 को ट्रेनों में रात के दौरान मोबाइल चार्जिंग की सुविधा को रोकने का आदेश जारी किया है। यह निर्णय लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। अब यात्री रात के समय ट्रेनों में लगे मोबाइल चार्जिंग पॉइंट का उपयोग नहीं कर पाएंगे। रेलवे प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को इस नए नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। यह कदम अचानक लिए गए फैसलों की श्रेणी में आता है, जिसका मुख्य उद्देश्य संभावित खतरों को कम करना है। ट्रेनों में यात्रा के दौरान चार्जिंग पॉइंट के अत्यधिक गर्म होने या शॉर्ट सर्किट होने की आशंका बनी रहती है, जिसे देखते हुए यह सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। रेलवे बोर्ड के आदेश के बाद अब रात के समय चार्जिंग पोर्ट की बिजली आपूर्ति काट दी जाएगी। इस फैसले से लाखों यात्रियों की यात्रा प्रभावित होगी, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से इसे एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। स्टेशन के तकनीकी कर्मचारियों को इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है।
फैसले के पीछे की तकनीकी वजह
रेलवे ने इस फैसले के पीछे तकनीकी कारणों का हवाला दिया है, जो विशेष रूप से रात के समय होने वाली घटनाओं से जुड़े हैं। ट्रेनों के भीतर लगी चार्जिंग यूनिट्स में रात के दौरान बिजली के ओवरलोड होने का जोखिम बना रहता है। कई बार यात्री मोबाइल को पूरी रात चार्जिंग पर लगाकर छोड़ देते हैं, जिससे उपकरणों के जलने या आग लगने की संभावना बढ़ जाती है। रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, रात में सोते समय यात्रियों को इन समस्याओं का पता नहीं चल पाता, जो बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। चार्जिंग पॉइंट के पास सामान रखने से भी गर्मी पैदा होती है, जो आग को हवा दे सकती है। इसी को रोकने के लिए रेलवे ने रात में चार्जिंग सुविधा को पूरी तरह बंद रखने का विकल्प चुना है। रेलवे के इंजीनियरों की टीम अब ऐसी व्यवस्था पर काम कर रही है जिससे एक निश्चित समय के बाद ये पॉइंट स्वचालित रूप से बंद हो जाएं। सुरक्षा ऑडिट के दौरान बार-बार आग की घटनाओं का विश्लेषण करने के बाद ही रेलवे ने यह बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि रहे।
यात्रियों पर प्रभाव और पृष्ठभूमि
भारतीय रेल नेटवर्क पर हर दिन करोड़ों लोग यात्रा करते हैं, और मोबाइल चार्जिंग एक अनिवार्य सेवा बन चुकी है। हालांकि, सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह नया नियम यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाने के लिए प्रेरित करेगा। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने उपकरणों को पूरी तरह चार्ज रखें। यह बदलाव रेलवे की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें ट्रेनों के अंदर आग से जुड़ी घटनाओं को शून्य पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व में भी रेलवे ने मोबाइल चार्जिंग पॉइंट के पास ज्वलनशील पदार्थ न रखने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब पूरी तरह से बिजली की आपूर्ति बंद करना अधिक प्रभावी उपाय माना जा रहा है। इस नियम का असर विशेषकर उन यात्रियों पर पड़ेगा जो लंबी दूरी की यात्रा करते हैं और रात में अपने फोन का उपयोग अधिक करते हैं। यात्रियों को अब अपने पावर बैंक साथ रखने की सलाह दी जा रही है ताकि रात में किसी प्रकार की असुविधा न हो। आने वाले दिनों में रेलवे इस आदेश के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा ताकि सभी ट्रेनों में इसका पालन सुनिश्चित किया जा सके।