रूसी सेना में फंसे भारतीयों की जानकारी
भारत सरकार ने बुधवार को रूसी प्रशासन के समक्ष उन 69 भारतीय नागरिकों का मुद्दा उठाया है, जिनके रूसी सेना में तैनात होने की सूचना मिली है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस वार्ता के दौरान स्पष्ट किया कि सरकार इन नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रही है। अब तक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कुल 259 भारतीयों के रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती होने की खबर सामने आई थी। सरकार की सक्रियता के कारण इनमें से 139 लोगों को पहले ही सेना से मुक्त कराया जा चुका है और वे भारत वापस आ गए हैं। शेष व्यक्तियों की वर्तमान स्थिति और उनके स्थान की जानकारी हासिल करने के लिए रूसी अधिकारियों के साथ निरंतर संवाद किया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन सभी नागरिकों को रूसी मोर्चे से सुरक्षित बाहर निकालना है ताकि वे जल्द से जल्द अपने घर लौट सकें। इस संवेदनशील मामले में विदेश मंत्रालय बारीकी से प्रत्येक नागरिक की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और रूसी प्रशासन से त्वरित प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहा है।
सशस्त्र बलों में भर्ती और हताहतों का ब्यौरा
यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष में रूसी सेना के लिए काम करते हुए 51 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। यह दुखद आंकड़ा पिछले कुछ महीनों में भारतीय अधिकारियों द्वारा साझा किया गया है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि रूसी सेना में भारतीयों की भर्ती का कुल आंकड़ा 259 तक पहुंच गया था। इन लोगों को विभिन्न माध्यमों से रूसी सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया था, जो बाद में युद्ध के खतरनाक मोर्चों पर पहुंच गए। सरकार के अथक प्रयासों से 139 व्यक्तियों को समय रहते मुक्त करा लिया गया है, जो एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। वर्तमान में 69 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी की चुनौती सरकार के सामने है, जिनके लिए लगातार रूसी अधिकारियों से संपर्क साधा जा रहा है। सरकार इस बात पर जोर दे रही है कि रूसी सेना में सेवा दे रहे किसी भी भारतीय की सुरक्षा सर्वोपरि है और उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया में कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही है।
रूस में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और स्थिति
रूस में वर्तमान में 30,000 से अधिक भारतीय छात्र और लगभग 70,000 अन्य नागरिक शिक्षा या रोजगार के सिलसिले में निवास कर रहे हैं। भारतीय दूतावास वहां रहने वाले अपने सभी नागरिकों की सहायता के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। साइबेरिया के एक शोध संस्थान में कर्मचारी की मृत्यु से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार वहां उत्पन्न होने वाली किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, बीमारी या शोध संस्थान से संबंधित किसी भी विशेष मुद्दे पर संबंधित स्थानीय अधिकारियों की जानकारी ही अधिक विश्वसनीय है। भारतीय सरकार का स्पष्ट रुख है कि रूस में रहने वाले प्रत्येक भारतीय की सुरक्षा उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी भी तरह की मुश्किल में फंसे नागरिक तक सहायता पहुंचाने के लिए विदेश मंत्रालय के अधिकारी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। भविष्य में रूसी अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर इन नागरिकों की सुरक्षा का दायरा और मजबूत किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी को टाला जा सके।